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इस गांव में 65 साल से सूनी है भाइयों की कलाई, रक्षा बंधन के दिन भाई-बहन घरों में रहते हैं कैद

Saturday, August 21, 2021 | Saturday, August 21, 2021 WIB

रक्षा बंधन के दिन देश और दुनिया भर में बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है. लेकिन उत्तर प्रदेश में एक गांव ऐसा है जहां इस दिन भाई और बहनें घर के अंदर कैद रहते हैं. पूरे गांव में सन्नाटा और डर पसरा रहता है. यहां के लोगों को डर है कि अगर बहनें भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बाधेंगी तो अनहोनी हो जाएगी.




उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला स्थित भीकमपुर जगत पुरवा गांव में रक्षा बंधन के त्योहार को लेकर कोई उत्सुकता नहीं रहती है. गांव के लोगों का कहना है कि अगर उन्होंने रक्षा बंधन का त्योहार मनाया तो उनके साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है. गांव के लोग कई अजीबोगरीब घटनाओं को देखते हुए इस त्योहार को मनाने से बचते हैं.


यहां गांव का हर एक शख्स अब रक्षा बंधन पर किसी बच्चे के पैदा होने का इंतजार कर रहा है. उनका कहना है कि ऐसा होने के बाद ही गांव में रक्षा बंधन मनाया जा सकेगा. जगत पुरवा गांव की छोटी सी आबादी के बीच करीब 200 बच्चे रहते हैं जिन्हें राखी पर अशुभ घटनाओं का डर रहता है. गांव के बुजुर्गों से भी अक्सर इसके बारे में किस्से सुनने को मिलते हैं.




इस गांव में रहने वाले लोग कहते हैं कि वजीरगंज पंचायत के इस गांव में 50 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है जब बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी थी. इतना ही नहीं, इसके आस-पास के गांव में भी लोग रक्षा बंधन का नाम सुनकर घबरा जाते हैं.


यहां रक्षा बंधन पर गांव में कोई बहन अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधती है. गांव के लोग नहीं चाहते कि उनके पूर्वजों द्वारा बनाई गई इस परंपरा को तोड़ा जाए. लोग कहते हैं कि यहां के किसी भी घर में जब कोई बहन अपने भाई को राखी बांधती हैं तो अजीब सी घटनाएं देखने को मिलती हैं.


लोग कहते हैं कि देश की आजादी के आठ साल बाद 1955 में रक्षा बंधन के दिन यहां के एक परिवार में शख्स की हत्या कर दी गई थी. तभी से इस गांव में बहनें रक्षा बंधन पर अपने भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांध रही हैं.



 करीब 10 साल पहले भी बहनों के कहने पर रक्षा बंधन का त्योहार शुरू करने का फैसला किया गया था, लेकिन यहां फिर एक अजीबोगरीब घटना हो गई. तबसे दोबारा किसी ने राखी मनाने की हिम्मत नहीं दिखाई. यह डर आज भी बहनों को भाई की कलाई पर राखी बांधने से उन्हें रोकता है.


गांव में रहने वाले लोगों का कहना है कि अगर रक्षा बंधन के त्योहार पर उसी परिवार में किसी बच्चे का जन्म होता है तो इस त्योहार की परंपरा को फिर से शुरू किया जा सकता है. इस लम्हे का इंतजार देखते-देखते करीब तीन पीढ़ियां गुजर गई हैं. सालों से यहां हर भाई की कलाई सूनी ही नजर आती है.


गांव के लोग कहते हैं कि उन्होंने सिर्फ रक्षा बंधन के त्योहार के बारे में सुना है, लेकिन इसे सेलिब्रेट करने का सौभाग्य उन्हें कभी नहीं मिला. रक्षा बंधन तो दूर इस गांव के लोग इस दिन घर से बाहर भी नहीं निकलते हैं. त्योहार पर पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहता है. यहां ऐसा लगता है जैसे किसी का मातम मनाया जा रहा हो.





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