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कौन हैं मनिका बत्रा जिससे भारत गोल्ड मेडल की कर रहा उम्मीद, पहले भी रच चुकी हैं इतिहास

Sunday, July 25, 2021 | Sunday, July 25, 2021 WIB

भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए यूक्रेन की मागरिटा सोसका के खिलाफ टोक्यो ओलंपिक के महिला सिंगल्स इवेंट का अपना दूसरे दौर का मुकाबला जीत लिया है. 




इसके साथ ही बत्रा पदक जीतने से केवल एक कदम दूर हैं. बत्रा इस मैच में अपने शुरुआती गेम हार गई थी. लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की और अगले दोनों गेम जीत स्कोर 2-2 की बराबरी पर ला दिया.


मनिका बत्रा की बात की जाए तो वह ऐसी भारतीय  खिलाड़ी हैं जो भारत के लिए पहले भी इतिहास रच चुकी हैं. उन्होंने 2018 के  कॉमनवेल्थ  गेम्स में  भारत के लिए टेबल टेनिस में नई स्टार बनकर उबरी थी और चर्चा में आई थी.


मनिका (Manika Batra) ने सिंग्लस, वुमेन डबल्स, मिक्सड डबल्स  और टीम इवेंट में भारत के लिए चार मेडल अपने नाम किए थे. जिसमें से दो गोल्ड भी शामिल थे. इस बार टोक्यो में मनिका बत्रा दूसरी बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले रही  है.   मनिका बत्रा का  अब तक का सफर शानदार रहा है.



बताया जाता है कि उन्होंने  8 साल की उम्र में ही टेबल टेनिस (table tennis) की प्रोफेशनल एकडेमी ज्वाइन कर  ली थी. 13 साल की उम्र में मनिका को  भारत के लिए पहला ब्रेक थ्रो मिला था और इसके बाद इस खिलाड़ी ने कभी वापस मुड़कर नहीं देखा.


 2016 में उन्होंने एशियन चैंपियनशिप (Asian Championship) में मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था. 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मनिका ने  अपना  दम दिखाया था और अब टोक्यो ओलंपिक में भी इस जीत साथ भारत की उम्मीदें बढ़ा दी है.


मनिका बत्रा के बारे में जानें- 

मनिका बत्रा का जन्म 15 जून 1995 को दिल्ली में हुआ था. वह अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटी हैं. इनका परिवार नारायणा विहार दिल्ली में रहता है. उन्होंने मात्र 4 साल की उम्र में ही टेबल टेनिस खेलना शुरू कर दिया था. 



इनकी बड़ी बहन और बड़े भाई दोनों ही टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं. राज्य स्तर अंडर-8 प्रतियोगिता जीतने के पश्चात् बत्रा ने संदीप गुप्ता से प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया, जिन्होंने उन्हें हंसराज मॉडल स्कूल में प्रवेश लेने को कहा जहां उनकी शिक्षा पूरी हुई.


राज्यवर्धन सिंह राठौर से प्रेरित-

मनिका बत्रा कहती हैं, 'जब मैंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला था तब मैं 16 साल की थी और 2011 में मैंने इशिकावा में सैंटियागो, चिली में एक अंडर-21 मैच में को हराया था. जब वह दुनिया में चौथे स्थान पर थी. वह एक ओलंपियन थी, इसलिए मैंने सोचा, अगर मैं उसे हरा सकती हूं, तो मैं भी जाकर ओलिंपिक खेल सकती हूं.


बातौर मनिका, जब कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर ने 2004 एथेन ओलंपिक में रजत पदक जीता था, जिसने मुझे ओलंपिक में पहुंचने और अपने देश के लिए खेलने की कोशिश करने के लिए बहुत प्रेरणा दी. मुझे लगा कि मुझे अपने देश के लिए भी जीतना है और ओलंपिक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना है.




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