--> फोन टैपिंग कांड : वो किस्सा जिसके चलते एक मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा, B.S यदुरप्पा पर दो साल पहले लगे थे जासूसी के आरोप | NIO TIMES

Notification

×

Iklan

Iklan

Most Popular

फोन टैपिंग कांड : वो किस्सा जिसके चलते एक मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा, B.S यदुरप्पा पर दो साल पहले लगे थे जासूसी के आरोप

Monday, July 26, 2021 | Monday, July 26, 2021 WIB

भारत में में जासूसी कांड का इतिहास नया नहीं है. राजनीति और जासूसी या फोन टैपिंग का रिश्ता बहुत पुराना है. इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर सांसद, उद्योगपति और सिनेमाई जगत के लोगों के नाम पहले भी आ चुके हैं. जासूसी कांड के चलते देश में सरकारें गिरने का भी इतिहास रहा है.




पेगासस जासूसी कांड को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं. मामले को लेकर संसद से लेकर सड़क  तक हंगामा हो रहा है. आज हम आपको ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं, जब सिर्फ फोन टैपिंग के चलते एक मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था.


जो कहानी आपको बताने जा रहे हैं फोन टैपिंग और सरकार गिरने की यह साल 1983 से शुरू होती है. कर्नाटक में रामकृष्ण हेगड़े पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने थे. रामकृष्ण हेगड़े ने पांच साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने पास रखी. हेगड़े के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक वक्त पर उन्हें जनता तक की ओर से प्रधानमंत्री पद का प्रमुख दावेदार तक माना जाने लगा था. 


वह 1983 और 1985 में लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके थे. इस वजह से अपनी ही पार्टी में उनके कई विरोधी भी बन गए थे. लेकिन साल 1988 में उनके लिए फोन टैपिंग का ऐसा भूत समाने आया जिसने उनकी कुर्सी छीन ली. 




 1988 में मीडिया में फोन टैपिंग को लेकर एक रिपोर्ट आई. रिपोर्ट में कहा गया कि कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सत्ताधारी जनता पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं.  


वर्ष 1988 में तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी बोफोर्स घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे थे. संसद में राजीव गांधी सरकार से फोन टैपिंग पर सवाल पूछा गया. जिसके बाद राजीव गांधी ने जांच एजेंसियों को कर्नाटक में ऐसी किसी भी गतिविधि की जांच के आदेश दे दिए थे.


जांच में सामने आया था कि डीजीपी ने 50 से अधिक नेताओं व मंत्रियों के फोन टेप आदेश दिए थे. इस बीच जो बात हेगड़े के खिलाफ गई वो यह जिन लोगों के फोन टेप करवाए जा रहे थे, वे सभी हेगड़े के विरोधी थे. 


इसके बाद बोफोर्स में घिरी राजीव गांधी सरकार के पास विपक्ष को घेरने का बड़ा हथियार हाथ लग गया था. जनता दल के तीन बड़े नेता चंद्रशेखर, अजीत सिंह और देवेगौड़ा जो कि पार्टी में रामकृष्ण हेगड़े के प्रतिद्वंदी थे, उन्होंने हेगड़े से इस्तीफा देने के लिए कह दिया.


इसके बाद चौतरफा दबाव से घिरे हेगड़े ने भी एक बड़ा कदम उठाया. उन्होंने कर्नाटक के बजाए दिल्ली आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे का एलान किया. इस तरह सिर्फ फोन टैपिंग के आरपों के चलते एक मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा. 


सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री B.S यदुरप्पा ने इस्तीफे के ऐलान किया. 2 साल पहले यदुरप्पा पर भी फोन टैपिंग और जासूसी के आरोप कर्नाटक के कुछ विधायकों ने लगाए थे.


×
Latest Updates Update