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यूपी की उस महिला मुख्यमंत्री की कहानी जो कभी सायनाइड का कैप्सूल लेकर घूमती थी

Friday, June 4, 2021 | Friday, June 04, 2021 WIB

उत्तर प्रदेश, मुलायम सिंह यादव अभी कॉलेज की पढ़ाई करते करते राजनीति में आने के लिए झटपटा रहे थे. इधर कांग्रेस ने 7 दिसंबर 1960 को चंद्रभान गुप्ता को उत्तर प्रदेश का तीसरा मुख्यमंत्री बनाया दिया. ये वो दौर था जब उत्तर प्रदेश में चंद्रभान गुप्ता की तूती बोतती थी. 1962 विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में कांग्रेस दो धड़ों में बट गई. एक चंद्रभान गुप्ता का था और दूसरा कमलापति त्रिपाठी का ग्रुप. जवाहरलाल नेहरू ने 1962 के विधानसभा चुनाव में सुचेता कृपलानी को अपना हथियार बनाकर उत्तर प्रदेश भेजा और बस्ती जिले के मेढ़वाल विधानसभा से चुनाव लड़वा दिया.


Story of Former Chief Minister of Uttar Pradesh Sucheta Kriplani


इस चुनाव की रोचक बात ये थी की यूपी के मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता चुनाव हार गए और इधर सुचेता कृपलानी जीत गई. 1963 में कांग्रेस कामराज प्लान लेकर आई. इस प्लान में कहा गया था कि पुराने लोगों को अपने पद छोड़ने होंगे ताकि देश के हर राज्य में कांग्रेस पार्टी को मजबूत किया जा सके. 


चंद्रभानु गुप्ता को मुख्यमंत्री पद से हटाते ही समस्या खड़ी हो गई कि अब किसको मुख्यमंत्री बनाया जाए. क्योंकि चौधरी चरण सिंह, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा समेत कई लोग मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे.


चंद्रभानु गुप्ता का ग्रुप बहुत गुस्से में था. उधर बांकि खेमों में भी हलचल तेज थी. लेकिन कांग्रेस ने कुछ ऐसा किया जिसकी उम्मीद किसी नहीं थी और एक औरत को बना दिया मुख्यमंत्री. उस वक्त तक देश के किसी भी राज्य में कोई औरत मुख्यमंत्री नहीं बनी थी. सुचेता कृपलानी पूरे देश में आजादी के बाद पहली महिला मुख्यमंत्री थी. सुचेता बंगाली थीं. दिल्ली में पढ़ी थीं. यूपी से कोई नाता नहीं था. पर ये दांव चलकर कांग्रेस ने अपने विद्रोहियों को शांत कर दिया.


हालांकि, यह भी कहा जाता है कि चंद्रभान गुप्ता को जब लगा की वो मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे और विधानसभा का चुनाव भी हार चुके थे ऐसे में उन्होंने ही सुचेता कृपलानी को उकसाया था मुख्यमंत्री बनने के लिए, ताकि उनका प्रमुख विरोधी कमलापति त्रिपाठी मुख्यमंत्री ना बन पाए. 


सुचेता कृपलानी के ही शासन काल में एक घटना हुई उत्तर प्रदेश में जो इतिहास बन गई. सरकारी कर्मचारियों ने पेमेंट बढ़ाने के लिए हड़ताल थी और यह हडताल 62 दिनों तक चली लेकिन पेमेंट नहीं बढ़ाया.


सुचेता कृपलानी को वैसे तो राजनीति को साधने के लिए ही कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री बनाया था लेकिन ये सच है कि सुचेता उन चंद गिनी चुनी महिलाओं में से एक है जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया था और जेल भी काटी थी. इस दौरान वो गांधी जी के आंदोलनों का भी हिस्सा रही.


 1946 में बंगाल के नोआखली में हुई हिंसा के दौरान सुचेता कृपलानी महात्मा गांधी के साथ काफी दिनों तक यहां थी. कहते हैं इस दौरान सुचेता अपने पास एक साइनाइट का कैप्सूल रखती थी क्योंकि यहां पर लड़कियों और महिलाओं के साथ कब कौन सी घटना घट जाए कहा नहीं जा सकता था.


इधर फिर लौटते है उत्तर प्रदेश की तरफ, 1967 में फिर विधानसभा चुनाव हुए इस बार कांग्रेस ने कृपलानी को नहीं बल्की चंद्रभान गुप्ता को फिर से मुख्यमंत्री बना दिया. 


लेकिन 1967 में हुए इस बार के चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति कांग्रेस के हाथों से निकलने के लिए फडफड़ाने लगी थी. 28 साल की उम्र में मुलायम सिंह यादव पहली बार विधायक बनकर विधानसभा में आ गए थे. उधर सुचेता कृपलानी की तबीयत खराब रहने लगी तो 1971 में राजनीति से संन्यास ले लिया और फिर 1974 में उनकी मौत हो गई.

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