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सोनागाछी की कहानी, कोलकाता की इस 'बदनाम' गली को कैसे मिला ये नाम ?

Tuesday, May 4, 2021 | Tuesday, May 04, 2021 WIB

कोलकाता. आज हम आपको भारत में चल रहे देह व्यापर के उस अड्डे की तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं जहां करीब दस हजार से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां हर दिन अपने जिस्म का सौदा करने को तैयार रहती हैं. भारत के बंगाल राज्य की राजधानी से कुछ दूरी पर स्थित सोनागाछी एरिया (Sonagachi red light area) एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया कहा जाता है.

प्रतीकात्मक फोटो


सोनागाछी को लेकर लोगों के अंदर कई तरह की भ्रांतियां और कहानियां है. सोनागाछी आखिर है क्या और कैसे बन गया एशिया का सबसे बड़ा देह व्यापार का अड्डा. कौन था वो खुंखार मुस्मिल डकैत जिसकी आत्मा को यहां के लोगों ने भगवान माना और उसके नाम को सोनागाछी (Sonagachi red light area) की तक्दीर मानने लगे.

 

कोलकाता में हुगली नदी के किनारे बसे.इस इलाका का नाम लोग कोने में, यार दोस्तों की महफिल में या दबी जुबान पर लेते हैं. सोनागाछी शब्द आपके कानों में कई बार गूंजा होगा. कभी रसीली और चटपटी बातचीत में तो कभी दर्दभरी लड़कियों की कहानियां सुनकर. यहां की 10 बाई 10 की खोलियों से कराह और कहकहों की आवाजें. किसी के लिए मनोरंजन होती है तो किसी के लिए पैसे के बदले एक सौदा...और किसी के लिए जिल्लत और जिंदगी की कहानी…यहां लगभग हर उम्र की लड़कियां मिलती है जो इस बाजार में अपने शरीर का सौदा करती है. 


कुछ लड़कियां यहां पर अपनी मर्जी से जिस्म बेचती हैं तो कुछ लड़कियों को जबरन इस दलदल में धकेल दिया जाता है. यहां कैसे महिलाएं लड़किया अपनी जिंदगी जीती है इसपर कई फिल्में और कई किताबें भी लिखी जा चुकी है.

प्रतीकात्मक फोटो

सोनागाछी कैसे बना और कैसे यह रेड लाइट एरिया बन गया इसके बारे में इतिहासकार पीटी नायर की किताब 'A history of Calcutta’s streets' के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस सोनागाछी (Sonagachi red light area) बनने की कहानी बताता है. जिसमें बताया गया है कि इस इलाके में करीब 300 साल पहले सनाउल्लाह नाम का एक खूंखार डकैत अपनी मां के साथ रहा करता था...कुछ दिन बाद उस डकैत की मौत हो गई. एक दिन डकैत सनाउल्लाह की रोती हुई मां ने अपनी झोपड़ी से एक आवाज सुनी....झोपड़ी से आवाज आ रही थी, "मां तुम मत रो...मैं एक गाजी बन गया हूं.


जल्द ही कहानी आस-पास के इलाके में फैलने लगी. इस झोपड़ी में लोग पहुंचने लगे और इबादत करने लगे... यहां आकर लोग बीमारियों से चंगे होने लगे. कहते हैं लोगों को यहां डकैत सनाउल्लाह की रुह का एससाल होता था...इसके बाद यहां सनाउल्लाह की मां ने अपने बेटे की याद में एक सुंदर मस्जिद बनवा दी. 


इसे सोना गाजी मस्जिद के नाम से जाना जाने लगा. कुछ दिन के बाद सनाउल्लाह की मां की मौत हो गई. इस मस्जिद की वजह से पड़ोस के इलाके का नाम मस्जिद बाड़ी पड़ा और सोना गाजी से बदलते बदलते इसका नाम सोनागाछी हो गया.

प्रतीकात्मक फोटो

सोनागाछी (Sonagachi red light area) एक विकसित इलाका है और यह कोलकाता नगर निगम के अंदर आता है. अंग्रेजों के जमाने से ही यह इलाका देह व्यापार का केंद्र रहा है. व्यापारी पानी के जहाज से यहां आते थे. इनमें पुर्तगाल और अर्मेनिया के तिजारती ज्यादा हुआ करते थे. यहां मजदूर भी बहुत ज्यादा काम करते थे और लोगों की भीड़ जमा होती थी. 


10 हजार से ज्यादा सेक्स वर्कर यहां रहती है-

सोनागाछी देह व्यापार का इतना बड़ा अड्डा कैसे बन गया इसका कोई शुरूआती इतिहास नहीं मिला है  और ना ही इस बात की भी सही जानकारी नहीं है कि कैसे सोनागाछी एक रेडलाइट एरिया (Sonagachi red light area) में बदल गया. कुछ आंकडों के मुताबिक यहां 10,000 से ज्यादा सेक्स वर्कर यहां काम करती हैं... हर उम्र...हर क्षेत्र और धर्म की लड़कियां यहां देह व्यापार करती हैं..

 

सेक्स वर्कर देह व्यापार को छोड़ना चाहती हैं-

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग एनजीओ के डाटा के मुताबिक यहां 89 प्रतिशत सेक्स वर्कर कर्ज के जाल में फंसी हुई हैं. जीवनयापन के लिए दलालों और वेश्यालयों के मालिकों से यहां कराम करने वाली महिलाओं ने उधार ले रखा है. इसक वजह से इनका शोषण और हो सकता है. रिपोर्ट की मानें तो 73 फीसदी सेक्स वर्कर देह व्यापार को छोड़ना चाहती हैं लेकिन वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाती हैं क्योंकि उनके उपर कर्ज है और उन्हें डर है कि बाहर की दुनिया उन्हें स्वीकार नहीं करेगी...

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