-->

Notification

×

Iklan

Iklan

Most Popular

इजरायल और फिलिस्तीनियों की जंग में कौन गलत है, समझिए पूरे विवाद की कहानी

Friday, May 14, 2021 | Friday, May 14, 2021 WIB
इजरायल और हमास के लड़ाकों के बीच तनाव चरम पर है. हमास फिलिस्तीनी अरब के लोगों का एक आतंकवादी संगठन है, और इस संगठन का मुख्य उद्देश्य है फिलिस्तीन राष्ट्र को फिर से अस्तित्व में लाना और इजरायल द्वारा छीनी गई जमीन को हासिल करना.




यानी अभी दोनों पक्षों के बीच जो लड़ाई चल रही है, वो नई नहीं है. विवाद पुराना है, बस संघर्ष नया है. कुछ लोग कहते है कि इजराइल और फिलिस्तीनियों की लड़ाई दो भाईयों की तरह है..तो फिर दो भाई दुष्मन कैसे बन गए और क्यों यहां युद्ध के जैस् हालत बन चुके हैं.....इसे समझने के लिए आपको शुरू से वो कहानी समझनी होगी जहां से इसकी शुरूआत हुई.

साल 1948 में इजरायल एक देश के तौर पर स्थापित हुआ, लेकिन इसे मध्य पूर्व यानि कि इस्लामिक देशों ने कभी भी मान्यता नहीं दी. काफी संघर्ष के बाद तय हुआ कि पश्चिमी यरुशलम के हिस्सों पर इजरायल का हक होगा और पूर्वी यरुशलम के हिस्सों पर जॉर्डन का अधिकार होगा. वहां जॉर्डन की सेना तैनात रहेगी. 

इस तरह से तब यरुशलम को बांटा गया. लेकिन ये बंटवारा अस्थाई था यानि की पूर्ण रूप से नहीं था. इसी बात को लेकर इजराइल और अरब मुस्लिमों के बीच तनाव होता रहा.

1967 में जब इजरायल ने सीरिया, जॉर्डन और फिलिस्तीनियों से युद्ध लड़ा और जीत गया..इसके बाद इजराइल ने पूर्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक पर भी कब्जा कर लिया. यानी ये दोनों इलाके जो जॉर्डन के पास थे, वो इजरायल ने उससे छीन लिए, और तभी से इन इलाकों में इजरायल और फलस्तीनियों के बीच हिंसक टकराव होता रहता है. इजरायल दावा करता है कि पूरा यरुशलम उसकी राजधानी है जबकि फिलिस्तीनी पूर्वी यरुशलम को भविष्य के फिलिस्तीन राष्ट्र की राजधानी मानते हैं.

 अमेरिका उन चंद देशों में एक है जो पूरे शहर पर इजरायल के दावे को मानते हैं. सरल शब्दों में कहें तो ये सारी लड़ाई पूर्वी यरुशलम के इलाकों के लेकर है. यहीं वो अल-अक्सा मस्जिद भी है, जहां पर हिंसा भड़की थी.

येरूसलम जो कि इजराइल की राजधानी हैं...यहां रहने वाले ईसाई, इस्लाम और यहूदी तीनों धर्मों के लिए अहम है... तीनों ही धर्म अपनी शुरुआत की कहानी को बाइबल के पैगंबर अब्राहम से जोड़ते हैं. ईसाई धर्म के लोग का कहना है कि यही कलवारी की पहाड़ी पर भगवान यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था.

वहीं मुसलमानों के लिए ये जगह इसलिए अहम है क्योंकि डोम ऑफ रॉक और अल-अक्सा मस्जिद यहीं पर स्थित है. ये मस्जिद इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है...  मुसलमान मानते हैं कि यहीं से पैगंबर मुहम्मद जन्नत की तरफ गए थे.

जबकि यहूदियों का कहना है कि यरुशलम ही वजह जगह है जहां आधारशिला रख पूरी दुनिया का निर्माण किया गया था और यही पर अब्राहम ने अपने बेटे आईजैक की कुर्बानी दी थी. 

यहूदियों वाले हिस्से में कोटेल या वेस्टर्न वॉल है, ये दीवार पवित्र मंदिर का अवशेष है.,,यानी यरुशलम ईसाई, इस्लाम और यहूदी तीनों धर्मों के केन्द्र में है और सारे विवाद की जड़ यहीं से शरू होती है.

अभी भी पूर्वी यरुशलम में यहूदी फिलिस्तीनियों को उनका घर छोड़ने की धमकी दे रहे हैं और वो उन्हें अल अक्सा मस्जिद में जाने से भी रोकते हैं... क्योंकि उनका कहना है कि ये जगह वेस्टर्न वॉल की है. यानी उनकी धार्मिक भावनाओं से जुड़ी है...रविवार को इस्राइली सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वी जेरुसलम से फिलिस्तीनियों के सात परिवारों को हटाने का आदेश जारी किया था.

इसका पालन करते हुए इस्राइल में स्थिति शेख जर्रा नामक जगह में रहने वाले 70 फिलिस्तीनियों को हटाकर यहूदियों को बसाया जाने लगा... लेकिन फिलिस्तीनी कोर्ट के इस आदेश से नाखुश थे, उन्होंने ने इसके लिए विरोध में इस्राइल में जगह-जगह पर आंदोलन शुरू कर दिए...यह प्रदर्शन हिंसक हो गया.

फिलिस्तीनियों द्वारा इस्राइली पुलिस पर भी पथराव किया गया... लेकिन असली विवाद तब शुरू हुआ जब मस्जिद में हैंड ग्रेनेड फेंके गए...और फिर उससे द से इजराइल और फिलिस्तीन के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है और हालता युद्ध की तरह लेकर जा रहे हें.

एक दिलचस्प जानकारी ये भी है कि दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक और इजराइल की राजधानी यरुशलम पर 52 बार हमला हो चुका है, 44 बार इस पर कब्जा हो चुका है.

×
Latest Updates Update