नंदीग्राम कोलकाता के मेदिनीपुर जिले का एक ग्रामीण इलाका है...यह राजधानी कोलकाता से दक्षिण-पश्चिम दिशा में करीब 70 किमी दूर है...इसके साथ ही औद्योगिक शहर हल्दिया के सामने और हल्दी नदी के दक्षिण किनारे में यह स्थित है.
नंदीग्राम विधानसभा का वैसे कोई खास इतिहास नहीं रहा है....लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में इसकी भूमिका रही खास रही है....1947 में स्वतंत्रता संग्राम से अलग अजाय मुखर्जी, सुशील कुमार धारा और सतीश चंद्र सामंत ने नंदीग्राम के लोगों की मदद से तामलुक इलाके को अंग्रेजों से मुक्त कराया था.
भारत जब स्वतंत्रता हुआ तो उसके बाद नंदीग्राम इलाका एजुकेशन का हब बन गया...हल्दिया बंदरगाह शहर के विकास में नंदीग्राम की अहम भूमिका रही...यहीं से हल्दिया को सब्जियां, चावल, मछली जैसे आवश्यक चीजे मिलती है...नंदीग्राम जिले में मुस्लिम आबादी 60 प्रतिशत है...यह मुस्मिल आबादी ममता बैनर्जी के लिए संजीवनी का काम कर सकती है....क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि मुस्लिम भाजपा की तरफ जाएंगी नहीं और इसका सीधा-सीधा फायदा ममता बैनर्जी की पार्टी TMC को होगा....
लेकिन सवाल है कि आखिर ममता बैनर्जी नंदीग्राम विधानसभा से चुनाव लड़ने का फैसला क्यों किया...और आखिर वो क्यों हमेशा नंदीग्राम को अपनी बड़ी बहन बताती रही है...तो चलिए अब हम आपको बताते हैं वो 'खूनी खेल' से जुड़ी है नंदीग्राम की डरावनी कहानी जिसका असर भारत ही नहीं बल्की दूनिया में भी दिखा..इसके साथ ही ममता ने दशकों पूराने लेफ्ट के साम्राज्य को उखाड़कर फेंक दिया...
बात साल 2007 की जब पश्चिम बंगाल में लेप्ट की सरकार हुआ करती थी...इसी साल लेफ्ट सरकार ने सलीम ग्रुप को स्पेशल इकोनॉमिक जोन नीति के तहत नंदीग्राम में रसायन केंद्र यानि के एक केमिकल हब बनाने की अनुमति दे दी थी...नंदीग्राम के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने इस इस केमिकल हब के बनने का विरोध शुरू कर दिया...इस विरोध में ग्रामीणों के साथ ममता बैनर्जी भी शामिल हो गई...
यह आंदोलन बढ़ता गया और इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तकरार भी शुरू हो गई... पुलिस ने ग्रामीणों के विद्रोह को कुचलने के लिए गोलीबारी शुरू कर दी...इस दौरान 14 ग्रामीणों की मौत हो गई थी..क्योंकि ममता बैनर्जी इस घटना के विरोध में थी इसलिए यहां उनको समर्थन मिला और यहां से लेफ्ट जमींदोज हो गई....2007 में हुई इस घटना के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व अटार्नी जनरल रैमसे क्लार्क नवंबर 2007 में नंदीग्राम का दौरा किया था...और यहां पर पीड़ित ग्रामीण परिवारों से मिले थे...
नंदीग्राम को ममता बनर्जी खुद के लिए लकी मानती हैं... जनवरी में नंदीग्राम के तेखाली इलाके में एक चुनावी सभा में ममता ने कहा था कि नंदीग्राम मेरी बड़ी बहन है... 2007 की घटना के बाद ममता की अगुवाई में टीएमसी ने बुद्धदेव भट्टाचार्य की वामपंथी सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था...इसके बाद पूरे पश्चिम बंगाल में 2011 में वामपंथ का किला ढह गया और ममता सरकार का उदय हो गया...
ममता बनर्जी 11 मार्च को महाशिवरात्रि के दिन नंदीग्राम से अपना नामांकन दाखिल करेंगी...यहां से उन्हें तृणमूल छोड़कर भाजपा गए शुभेंदु चुनौती देंगे...पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में यह सबसे बड़ी हॉट सीट होने वाली है...जिस पर हर किसी की नजर रहेगी...
