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चरस, गांजा बैन है तो भांग दुकानों पर क्यों मिलती है?

Wednesday, March 24, 2021 | Wednesday, March 24, 2021 WIB
फतेहपुर : ऐसी हजारों खबरे रोज़ अखबारों की सुर्खियां बनती है, जिसमें चरस. गांजा. स्मैक. की खबरें प्रमुख होती है. लेकिन क्या ड्रग्स  पर रोक लग पाई, तो शायद जवाब होगा बिल्कुल नहीं, बल्कि उससे कई गुना तेजी से यह मौत का सामान बड़े शहरों से छोटे शहरों तक तेजी फैल रहा है. 
 
अक्सर तमाम घर इन नशों के चलते बर्बाद हो जाते हैं. लेकिन फिर भी  इसमें लगाम लगाना मुश्किल हो रहा है. गारंटी से नशा छूट जाएगा– ऐसे  तमाम इश्तेहारों से छोटे शहरों की दीवारें और खम्भे पुते पड़े रहते हैं. लेकिन हाल क्या है आप बेहतर जानतें है।
फतेहपुर के हरिहरगंज से जब आप ज्वालागंज की तरफ चलेंगे तो हरिहरगंज पुलिस चौकी से महज 500 मीटर की दूरी पर बड़े पैमानें में  गाँजा बेचा और खरीदा जाता है. और यह सब पुलिस की मौजूदगी में होता है. पुलिस खड़ी रहती है और गाँजे की दुकानदारी होती रहती है।

तो क्या ये मान लिया जाए कि ये सब पुलिस की काया-माया है 

फतेहपुर का वर्मा चौराहा जिले के उन व्यस्ततम चौराहों में से एक है जहाँ दिन भर पुलिस की मौजूदगी बनी रहती है। बवजूद इसके चौराहे में बड़े पैमानें में गाँजे की पुड़ियाँ बेचा जाना पुलिस पर कई सावल खड़े करता है. कि क्या यह सब पुलिस की छत्रछाया में हो रहा है. या फिर इनको पुलिस का खौफ़ नहीं है.

साल 1985 में NDPS एक्ट  बना. जिसके मुताबिक़ किसी व्यक्ति को मादक दवाओं के निर्माण, उसकी खेती करना, ड्रग्स लाना-ले जाना, ड्रग्स की तस्करी करना,या इसमें पैसा लगाना या फिर खुद ड्रग्स लेना. जुर्म की श्रेणी में आता है. जिसमें छह महीनें से लेकर 20 साल तक की कठोर कैद की सज़ा हो सकती है.

सबसे जरूरी बात, अगर कोई व्यक्ति बार-बार एनडीपीएस एक्ट का उल्घन करता है, तो उसे अगली बार ''एनडीपीएस एक्ट धारा 31 (क)''  तहत पहले की तुलना में डेढ़ गुना सजा मिलती है. यहाँ तक की उसे मृत्युदंड भी दिया जा सकता है. 

''एनडीपीएस एक्ट के फर्जी मुकदमों से बचाने के लिए नडीपीएस एक्ट  की धारा 50 आपको बचाने काम भी करती हैं. इसके तहत अगर पुलिस या किसी जांच अधिकारी को किसी के पास नशीला पदार्थ होने का शक है तो उसकी तलाशी किसी गजेटेड अधिकारी या मजिस्ट्रेट के सामने ही ली जा सकेगी''.

अब सावल ये भी है ? कि क्या क़ानून का पालन सही तरीके से हो पाता है  या फिर नहीं ? 

अब आप इसे ऐसे समझ सकते है फतेहपुर का वर्मा चौराहा है  सबसे व्यस्त चौराहों में से एक है है फिर यहाँ आपको खुलेआम गाँजा बिकता मिल जाएगा. जो लोगों की ज़िंदगी के दिनों को, एक-एक दिन कम कर रहा है, लेकिन जिम्मेदार नोटों की चादर चढाए गहरी नींद में सो रहे है. 

"अब आपके मन में ये सवाल भी आया जरूर होगा, की जब चरस, गाँजा बैन है तो फिर भांग दुकानों पर आसानी से  कैसे मिल जाता है"

"इसका जावाब ये है" दरासल एनडीपीएस एक्ट भांग की खरीद और बिक्री की छूट देता है. ऐसे में भांग को सरकारी ठेकों के द्वारा बेचा और खरीदा जाता है, जिससे सरकारी खजाने में पैसे की बरसात होती है. लेकिन भाँग बेचनें वालों को भाँग से ओ प्रॉफिट नहीं हो पाता जो गाँजे  की बिक्री से होता है. और यही वजह की भाँग की दुकानों से गाँजा  धड़ल्ले से खरीदा और बेचा जाता है। 

नशे के नुकशान के बारे में न हमें ज्यादा कुछ पता होता है, और न ही हम इसके बारे में जानने  की कोशिश करते है, नशा हमें बड़ा आकर्षक और कूल तो लगता है. लेकिन हर एक नशा, जो कुछ घंटों के लिए हमें बेहतर महसूस करवाता है, वही हमारे जीवन से उतने ही दिन कम करता जाता है.  
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