बिहार की सियासत में चिराग पासवान ने पिछले 24 घंटे में जो किया है... उसकी गूंज पटना से लेकर दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक सुनाई दे रही है! सवाल ये नहीं है कि केंद्र में मंत्री होने के बावजूद, चिराग पासवान अपनी ही सरकार की पुलिस पर 'हत्या' का गंभीर आरोप लगा रहे हैं..सवाल तो ये है कि... चिराग पासवान
सम्राट चौधरी के उस कथित "एनकाउंटर कल्चर" पर सवाल उठा रहे हैं, जिसकी चर्चा भारत तिवारी की मौत के बाद तेज हो गई है?..तो क्या बिहार में सहयोगी दलों के बीच दरार की आहट सुनाई देने लगी है? और अमित शाह चिराग पासवान के बीच दिल्ली में हुई मीटिंग के माईने क्या ...चलिए समझते है इस रिपोर्ट में ...
जिस भरत तिवारी एनकाउंटर ने पूरे बिहार के लॉ-एंड-ऑर्डर को हिला कर रख दिया... उसी भरत तिवारी के घर, घुटनों पर बैठकर चिराग पासवान का दिया एक बयान NDA के भीतर ऐसा सियासी भूचाल खड़ा कर चूका है... जिसे संभालना अब शायद दिल्ली के भी बस का नहीं है! एक तरफ बीजेपी के मुख्यमंत्री पुलिस की पीठ थपथपा रहे हैं, और दूसरी तरफ उन्हीं के गठबंधन के चिराग पासवान इसे 'फर्जी एनकाउंटर' और 'हत्या' बता रहे हैं। तो क्या चिराग सीधे तौर पर सम्राट चौधरी और बीजेपी से बगावत कर रहे हैं? या फिर...लाखो लोगों की भीड़ देखकर, दिल्ली में बैठी बीजेपी चिराग के जरिए कोई बहुत बड़ा 'डैमेज कंट्रोल' करवा रही है?
सवाल ये भी है की क्या चिराग पासवान जो कर रहे हैं, उसकी स्क्रिप्ट खुद अमित शाह ने लिखी है? या फिर चिराग पासवान सम्राट चौधरी के इस "एनकाउंटर कल्चर" को हथियार बनाकर खुद की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को मजबूत कर रहे है? अमित शाह के साथ चिराग पासवान की बंद कमरे में हुई सीक्रेट मीटिंग... और उसके ठीक बाद चिराग का मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पुलिस पर "हत्या" का ठप्पा लगाना... ये कोई इत्तेफाक नहीं है।.. ये कई सवाल खड़े करता है ..
चिराग ने बिना नाम लिए अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री को जिस तरह से कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने उसके जरिये बिहार की जनता को यह संदेश देने की कोशिश की है कि जिस सुशासन के नाम पर आपने वोट दिया था, वो अब बेलगाम हो चुका है। सवर्णों के मुद्दे उठाकर चिराग पासवान ने खुद को सिर्फ एक वर्ग का नहीं, बल्कि 'सर्व समाज' का नेता घोषित कर दिया है। वो साबित कर रहे हैं कि अगर बिहार में एनडीए को बचाना है, तो चेहरा सम्राट चौधरी का नहीं, बल्कि चिराग पासवान का होना चाहिए।
चिरग ये जानते है की .बिहार में ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत और कायस्थ यानी सवर्ण वोटर्स की आबादी करीब 15 से 17 प्रतिशत है। यह वो वोट बैंक है जिसने मोदी के नाम पर आंख बंद करके एनडीए को वोट दिया है। लेकिन भरत तिवारी के एनकाउंटर ने इस पूरे समीकरण में आग लगा दी। तेरहवीं में उमड़ी लाखो लोगों की भीड़ ने दिल्ली में बैठे बीजेपी आलाकमान को यह साफ संदेश दे दिया कि— "अगर सम्राट चौधरी का यही एनकाउंटर कल्चर चलता रहा, तो सवर्ण बीजेपी को उखाड़ फेंकने में देर नहीं लगाएंगे।... और चिरग इसी नारजगी को डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे है ... .....
दवा तो ये भी की चिरग का खुलकर अपनी ही सरकार के खिलफ ऐसे बोलना शाह और चिरग की बड़ी प्लानिंग का हिस्सा है ..बीजेपी को सवर्णों का गुस्सा भी शांत करना है और अपनी सरकार की फजीहत भी बचानी थी।.. यही पर बीजेपी को चिराग की जरुरत महसूस हुई .. सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री होने के नाते खुद पुलिस के खिलाफ नहीं बोल सकते, इसलिए बीजेपी ने अपने सबसे भरोसेमंद 'हनुमान' को आगे कर दिया। ..
लेकिन चिरग सिर्फ बीजेपी के लिए काम नहीं कर रहे .. वो अपने लिए सवर्णों की सहनुभूति भी बटोर रहे है चिरग का बिलौटी गांव में जाकर सम्राट चौधरी के प्रशासन पर "हत्या" का ठप्पा लगाना कोई छोटी बात नहीं है। चिराग ने बिना नाम लिए सम्राट चौधरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है और ये साबित करने की कोशिश की है कि बिहार का प्रशासन अब बेलगाम हो चुका है। ..... .....
चिराग अब सिर्फ दलित नेता बनकर सीमित नहीं रहना चाहते। वो सवर्णों के मुद्दे उठाकर खुद को 'सर्व समाज' का नेता साबित कर रहे हैं। चिराग ये संदेश दे रहे हैं कि जब सम्राट चौधरी का प्रशासन फेल हो रहा है, तो बिहार को एक नए, युवा और सर्वमान्य चेहरे की जरूरत है। और वो नाम चिरग पासवान का भी हो सकता है ? इस एनकाउंटर की आड़ में असल लड़ाई मुख्यमंत्री की कुर्सी और वोट बैंक पर कब्जे की है। वैसे आपको क्या लगता है .. क्या चिराग खुद सवर्णों की मुद्दे उठा रहे है या ... फिर इसमें भी बीजेपी की कोई बड़ी रणनीति छुपी है .... और क्या इन सभी भारत तिवारी को न्य मिल जायेगा ....

