रामायण का नाम आते ही हमें भगवान राम, मां सीता और बजरंगबली याद आते हैं और हां रावण भी. क्योंकि अगर रावण रामायण में ना होता तो रामायण अधूरी रह जाती. लेकिन एक और भी प्रमुख पात्र था वो थी रावण की पत्नी मंदोदरी.
मंदोदरी आखिर कौन थी...रावण ने कैसे मंदोदरी को हथियाया...और फिर रावण की मौत के बाद विभीषण से मंदोदरी ने क्यों विवाह किया था...क्या आप ये सब जानते हैं...अगर नहीं जानते तो कोई बात नहीं आज हम आपको विस्तार से पूरी कहानी बताने वाले हैं.
मंदोदरी का नाम आते ही हमारी आंखों के सामने एक ऐसी रानी की तस्वीर उभर कर सामने आती जिसके पास सारे ऐशोआराम थे..मानों एक अप्सरा की बेटी जो बहुत की खुबसूरत औऱ दिखने में आकर्षक है.
सोने की लंका की महारानी मंदोदरी एक ऐसा पात्र जिसे शायद कभी ठीक से समझा ही नहीं गया. रावण की मौत के बाद लोग मंदोदरी को मानो भूल ही गए. बहुत कम लोग ही शायद यह जानते होंगे की रावण के मरने के बाद मंदोदरी का क्या हुआ.
प्रतीकात्मक तस्वीर
हिंदू पुराणों में बताया गया है कि मधूरा नाम की एक राक्षसी कैलाश पर्वत में गई थी. कैलाश पर्वत में भगवान शिव धूनी रमाए बैठे थे. मां पार्वती इस दौरान नहीं थी. शिव को अकेला देखकर मधूरा राक्षसी भगवान शिव को रिझाने लगी.
भोलेनाथ को आकर्षित करने के लिए नृत्य करने के साथ साथ और भी कई प्रयास किए. इसी दौरान मौके पर मां पार्वती पहुंच गई. मां पार्वती ने देखा की भगवान शिव के शरीर में पड़ी भस्म मधूरा राक्षसी के शरीर पर पड़ी थी. यह देखकर पार्वती क्रोधित हो गई और मधूरा राक्षसी को 12 साल तक मेढ़की बनने का श्राप दे दिया.
श्राप मिलते ही मधूरा को होश आ गया और वो क्षमा मांगने लगी. बहुत रोने धोने के बाद मां पार्वती ने कहा कि अगर तुम भगवान शिव की आराधना करोगी तो हो सकता है कि श्राप कम हो जाए. इस तरह से राक्षसी से मेढ़की बनी मधूरा 12 साल तक वहीं पर कुएं के अंदर तप करती रही.
अब आपको बताते हैं कि मेढ़की बनने के बाद राक्षसी मधूरा मंदोदरी कैसे बनी और कैसे रावण ने मंदोदरी को अपना लिया...
एक दिन सप्तश्रषि घूमते हुए वहीं पहुंचे जहां राक्षसी मधुरा मेढ़की बनी घूम रही थी. यहां पर सप्तश्रषियों ने रुकने का फैसला किया और रात में खीर बनाई. इस खीर में उसी दौरान खीर में एक सांप गिर गया. मेंढ़की ने यह सब देख लिया. ऋषियों का जीवन बचाने के लिए वह भी गर्म खीर में कूद गई और अपनी जान दे दी.
ऋषियों ने मेंढकी को अपनी खीर में कूदते देखा तो उन्हें बहुत क्रोध आया. वे गुस्से में आकर खीर से भरा पतीला फेंक रहे थे. उसी दौरान उन्होंने देखा कि खीर के अंदर सांप भी मरा हुआ था. वे समझ गए कि मेंढकी ने उनका जीवन बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए.
सप्तश्रषियों ने मेढ़की को फिर से जीवन दान देकर एक सुंदर कन्या बना दिया और नाम मंदोदरी रखा...तब से कहा जाता हैं कि मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान है.
कुछ समय बाद ऋषियों ने सोचा कि उनके ऊपर लांछन न लगा दे इसलिए मंदोदरी की परवरिश के लिए मयासुर को सौंप दिया. मयासुर ने मंदोदरी को बेटी की तरह पाला. दिन मयासुर से मिलने रावण उनके घऱ पहुंचा जहां मंदोदरी को देखऱ रावण मोहित हो गया.
मयासुर रावण से मंदोदरी की शादी नहीं करना चाहता लेकिन अपने बल और ताकत के दम पर रावण ने मंदोदरी से शादी कर ली और रानी बनाकर लंका लेकर आ गया. इस शादी से मंदोदरी भी खुश नहीं थी लेकिन उन्हें डर था कि आगर वो रावण के साथ नहीं जाएंगी तो उनकी प्रजा मारी जाएगी इसलिए उन्होंने भी इस शादी को स्वीकार कर लिया.
रावण का वध करने के बाद प्रभु श्रीराम ने विभीषण को लंका का नया राजा बनाने की सलाह दी और उन्हें मंदोदरी से विवाह करने का प्रस्ताव भी दिया था.
हालांकि. मंदोदरी ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए खुद को राज्य से अलग कर लिया था...लेकिन इसके कुछ दिन बाद मंदोदरी ने विभीषण से विवाह करने के लिए राजी हो गई थी और फिर इस तरह से विभीषण और मंदोदरी की शादी होती है और मंदोदरी फिर से लंका की महारानी बनती हैं.
इस कहानी के सभी तथ्य हिंदू पुराणों से लिए गए हैं. अगर इस कहानी को लेकर आपके मन में कोई सवाल हैं तो कॉमेंट बॉक्स में पूछिए हम जवाब देने की कोशिश करेंगे. कुछ पुराणों में ऐसे अलग तरह से भी बताया गया है लेकिन सभी प्रमाण धर्मग्रंथों पर आधारित है.

