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क्या है Strait of Hormuz और क्यों इसे दुनिया का सबसे खतरनाक Oil Choke Point कहा जाता है?

Saturday, March 28, 2026 | Saturday, March 28, 2026 WIB

हिन्दुस्तान  के जिस फैसले का इंतजार पूरी दुनिया कर रही थी... अब उस पर मोदी सरकार ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। ये सिर्फ एक कूटनीतिक फैसला नहीं ये भारत रूस  और इरान का वो मास्टर प्लान है ..जिसने सुपरपावर अमेरिका की भी नींद उड़ा दी है। जिस रूस ने हर  मुश्किल वक्त में भारत का साथ दिया आज वही रूस, ईरान के साथ भी सीना तानकर खड़ा हो गया है! ... 



तो क्या ये तीनों देश मिलकर दुनिया का नया 'Energy Power Center' बना रही हैं? आखिर क्या है उस सीक्रेट डील की इनसाईड स्टोरी जिसने दुनिया का नक्शा और समन्दर की ताकत... दोनों बदल दिए! और क्यों ईरान ने उस Strait of Hormuz' के वो दरवाजे भारत के लिए खोल दिए हैं...जो पश्चिमी ताकतों के लिए आज 'डेथ-ज़ोन' बन चुके हैं?  चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझाते है ..


भारत रूस और ईरान के बीच क्या डील हुई है ये आपको बताएँ .उससे पहले उस 'Strait of Hormuz' के बारे में जान लीजिये ..जिसके जरिये दुनिया का लगभग 20% और भारत के कुल कच्चे तेल  का लगभग 40-50% कच्चा तेल गुज़रता है।..ईरान के नियंत्रण वाला यह इलाका दुनिया का सबसे खतरनाक 'Choke Point' है। सिर्फ 33 किलोमीटर चौडे इस रस्ते की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाइए कि सऊदी अरब का 38%, इराक का 22%, यूएई का 15% और कुवैत का 9% तेल इसी संकरी गली से होकर गुजरता है। ... वैसे तो Strait of Hormuz'  पश्चिमो देशो के लिए पूरी तरह से बंद है .लेकिन भारत के लिए इरान  'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के दरवाजे खोल दिए हैं।

 

ईरान ने आधिकारिक तौर पर भारत को उन 5 'मित्र देशों' में शामिल किया है जिन्हें युद्ध के बीच भी 'Strait of Hormuz' से सुरक्षित निकलने के लिए 'Safe Passage' दिया जाएगा। ये भारत की कूटनीति का ही नतीजा है कि जहाँ दुनिया के जहाजों पर मंडराता खतरा बढ़ रहा है, वहां भारत के 'जग वसंत' और 'शिवालिक' जैसे टैंकर ईरान की सुरक्षा गारंटी के बीच सीना तानकर निकल रहे हैं। 


2022 के बाद… जब Russia और ईरान पर पश्चिमी देशों ने कड़े प्रतिबंध लगाए…तब दुनिया को लगा कि ये दोनों देश ग्लोबल सिस्टम से पूरी तरह से कट जाएंगे।इनका अस्तित्व मिट जाएगा। लेकिन यहीं पश्चिमी देशों से एक बड़ी चूक हो गई! और इसी चूक ने एक ऐसे 'स्ट्रेटेजिक ट्रायएंगल को जन्म दिया, जिसका हिस्सा बने भारत , रूस और इरान .. रूस के पास तेल था, ईरान के पास रास्ता... और भारत के पास थी दुनिया की सबसे बड़ी ज़रूरत! ...


लेकिन कहानी सिर्फ तेल और रास्ते तक सीमित नहीं है। अमेरिका की असली बेचैनी की वजह है—डॉलर की गिरती साख। जब वॉशिंगटन में बैठे रणनीतिकार भारत पर 50% टैरिफ और 'Section 301' की फाइलें तैयार कर रहे थे, उसी वक्त मोदी सरकार ने रूस और ईरान के साथ मिलकर 'नॉन-डॉलर ट्रेड' यानी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को जो रफ्तार दी,..ईरान के चाबहार पोर्ट के संचालन के लिए 10 साल के ऐतिहासिक समझौते पर मुहर लगा दी है। मोदी ने साफ कर दिया कि भारत अब किसी के इशारे पर नहीं, अपनी शर्तों पर व्यापार करेगा। पूरी दुनिया पूछ रही थी कि क्या भारत झुकेंगे? क्या अमेरिका के 'Section 301' की धमकियां भारत को डरा देंगी? लेकिन  हिन्दुस्तान ने अमेरिका जैसे देशो को ये सन्देश डे दिया ... की वो किसी के इशरे पर नहीं   बल्कि अपने फैसले खुद लिखता है 


तो क्या अब अमेरिका का 'ग्लोबल गेम' हमेशा के लिए खत्म हो चुका है? क्या भारत के इस एक फैसले ने दुनिया के सबसे बड़े सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है?  जबकि भारत रूस ईरान की दोरती को और मजबूत किया है रूस ने गारंटी दी है कि वो भारत की ऊर्जा जरूरतों को किसी भी कीमत पर रुकने नहीं देगा, और ईरान ने गारंटी दी है कि उन ऊर्जा रास्तों  पर भारत का एक भी जहाज असुरक्षित नहीं रहेगा।


रूस की दोस्ती, ईरान का साथ और भारत का अटूट संकल्प—यह वो त्रिकोण है जिसने 21वीं सदी के नए 'वर्ल्ड ऑर्डर' की नींव रख दी है। अमेरिका को अब समझ आ चुका है कि 'Section 301' की धमकियां भारत के हौसले नहीं तोड़ सकतीं। आज पूरी दुनिया देख रही है कि कैसे हिन्दुस्तान अपनी शर्तों पर इतिहास लिख रहा है।

 


  

 

 

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