प्रधानमंत्री मोदी के सामने चादर जैसे कपड़े पहनकर ये महिला कौन है जो पहुंच गई....अमित शाह प्रधानमंत्री मोदी ने पहले महिला को देखा. लेकिन जैसे महिला नजदीक पहुंचती है प्रधानमंत्री मोदी और अमित महिला इस महिला के आगे हाथ जोड़ लेते हैं... महिला के पैरों में ना तो चप्पल है औऱ ना ही चेहरे पर कोई चमक....तो कौन है ये महिला जिसके सामने भारत के प्रधानमंत्री भी खुद को छोटा समझते हैं..और इस महिला को पीएम मोदी मां कहकर क्यों बुलाते हैं.
दरअसल इसकी वजह ही ऐसी है....और इस महिला ने जो काम किया है वो आपके और हमारे बस की बात नहीं है..कभी स्कूल नहीं गई लेकिन इन्हें इनके काम की वजह से इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फॉरेस्ट कहा जाता है..इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी इनकी बहुत इज्जत करते हैं.
हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं जो बिना किसी स्वार्थ के देश में परिवर्तन लाने के लिए अपना पूरा जीवन दूसरों की सेवा में लगा देते हैं...ऐसे लोग ज्यादातर गुमनामी में रहकर भी अपने काम को करते रहते हैं...ऐसे ही लोगों में एक है कर्नाटक की रहने वाली ये तुलसी गौड़ा.
इन्हें जंगल की रानी कहा जाता है....इन्होंने ऐसे ऐसे काम किए है जो एक साधारण इंसान के लिए करना बहुत मुश्किल होता है...इसलिए प्रधानमंत्री मोदी भी खुद को नहीं रोक पाए और तुलकी गौड़ा को देखते ही इनके सम्मान में अपने हाथ जोड़ लिए.
जिस तस्वीर को आप देख रहे हैं...ये राष्ट्रपति भवन की है...सोमवार को राष्ट्रपति में रामनाथ कोविंद देश के सबसे सम्मानित पद्दम सम्मान बांट रहे थे.... राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में जैसे ही तुलसी गौड़ा का नाम लिया गया.... हर किसी की नज़र इनपर टिक गईं. तुलसी गौड़ा को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री अवार्ड से नवाज़ा. तुलसी गौड़ा जब दरबार हॉल में दाखिल हुईं तो उनकी सादगी ने सबका मन मोह लिया.
तुलसी गौड़ा ने कपड़े के नाम पर साधारण सी चादर जैसे कपड़े पहने थे. गले में आदिवासी जीवनशैली के कुछ मामूली सी मालाएं थी... बिना चप्पल के मतलब नंगे पैर पद्मश्री सम्मान लेने आईं.
तुलसी गौड़ा कर्नाटक के होनाली गांव की रहने वाली हैं..जब ये तीन साल थी तो इनके पिता की मौत हो गई थी...बहुत कम उम्र करीब 13 साल में ही इनकी शादी हो गई थी.. लेकिन कुछ सालों बाद ही इनके पति की भी मौत हो गई..जिसके बाद तुलसी गौड़ा की जिंदगी बेरंग और शून्य सी हो गई थी.
शायद किस्मत और भगवान ने तुलसी को किसी और मकदस से दुनिया में भेजा था....अकेलापन दूर करने के लिए तुलसी ने पेड़ पौधों से दोस्ती शुरू कर दी....और पिछले 6 दशक में 30 हजार से ज्यादा पौधे लगाएं है...ये तो एक आंकड़ा है सिर्फ...वरना कहा जाता है तुलसी ने करीब 1 लाख पौधे लगाएं है.
तुलसी गौड़ा कर्नाटक की हलक्की जनजाति से ताल्लुक रखती हैं और वह बेहद गरीब परिवार से आती हैं....देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजी गई है....इन्हें जंगलों की रानी के नाम से लोग जानते हैं....पर्यावरण सुरक्षा.. इनके योगदान और पेड़-पौधों समेत जड़ी-बूटियों की तमाम प्रजातियों के बारे में अथाह ज्ञान होने की वजह से इन्हें जंगलों की इनसाइक्लोपीडिया कहा जाता है.
तुलसी गौड़ा अभी भी कई नर्सरी की देखभाल करती हैं....इससे पहले भी तुलसी गौड़ा को इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र अवॉर्ड... 'राज्योत्सव अवॉर्ड... और 'कविता मेमोरियल' जैसे कई अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है.
8 तारीख को जब तुलसी गौड़ा को पद्मश्री मिल...तो तुलसी गौड़ा के सम्मान की ट्विटर से लेकर फेसबुक हर तरफ तारीफ हो रही है....भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के सामने जिस हालत में तुलसी गौड़ा पहुंची..इनकी भेषभूषा कभी चर्चा में रही..लेकिन कहते हैं ना कि बाहरी चमक धमक से ज्यादा हमारे मन और कर्मों की चमक ज्यादा माइने रखती है...तुलसी गौड़ा अभी भी नर्सरी के लिए काम करती है...और अपना पूरा जीवन प्रकृति औऱ पेड़ पौधों को लिए समर्पित किया है.
