लखनऊ. पहली बार राजा भैया के गढ़ कुंड़ा में एक दिलेर DSP जियाउल हक पहुंचा था. जिआउल हक शायद पहला वो ऑफसर था जिसने राजाभैया की आंख में आंख मिलकर चुनौती दी थी. लेकिन कुछ रोज बाद ही सरेआम पीट पीटकर एक दिलेर DSP की हत्या कर दी गई.
इस घटना को करीब 8 साल गुजर चुके हैं लेकिन डीएसपी जिआउल हक की आत्म आज भी इंसाफ के लिए भटक रही है. और डीएसपी की पत्नी परवीन कोर्ट के चक्कर काट रही हैं.
अखिलेश यादव योगी सरकार पर गुंड़ाराज और अपराध की दुहाई देकर हमला बोलते हैं. लेकिन शायद अखिलेश यादव ये भूल चुके हैं कि उन्हीं की सरकार में एक इमानदार डीएसपी की कुंड़ा में हत्या की गई थी. अखिलेश खुद मुख्यमंत्री होते हुए इंसाफ नहीं दिला पाए. आखिर क्यों ?
आज की कहानी करीब 8 साल पुरानी है..जब राजाभैया के गढ़ कुंड़ा में डीएसपी जियाउल पहुंचे थे. कहते हैं जियाउल हक पहले वो पुलिस अधिकारी थे जिन्होंने राजाभैया के घर जाकर कागजों में दस्तखत करने से मना कर दिया था.
राजाभैया को खुद जियाउल हक के दफ्तर मिलने जाना पड़ता था. यहीं से राजाभैया और जियाउल हक के बीच तकरार की वो लकीर खींच गई थी जिसे खत्म करना नामुम्कीन था.
बात मार्च 2013 की है जब प्रतापगढ़ जिले के कुंडा के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हें यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद हुई गोलीबारी में प्रधान के भाई सुरेश यादव की भी मौत हुई थी. वारदात की खबर सुनकर तस्कालीन डीएसपी जियाउल हक बलीपुर गांव में पहुंच गए. एक जिम्मेदार अधिकारी की तरह जियाउल स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन वहां पर मौजूद भीड़ ने डीएसपी जियाउल हक की पीट-पीटकर हत्या कर दी.
जिस भीड़ ने जियाउल हक की हत्या की थी. कहते हैं इसे राजाभैया ने ही भेजा था. राजाभैया तब अखिलेश सरकार में मंत्री थे और कुंड़ा के राजा तो हमेशा से ही रहे हैं.
अखिलेश यादव ने तब सीबीआई जांच की बात कही थी. लेकिन सीबीआई की जो टीम जांच कर रही थी पर भी हमला हुआ. लेकिन जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे की सीबीआई राजाभैया के खिलाफ एक भी सबूत नहीं ढूंढ पाई और अपनी रिपोर्ट में क्लीन चीट दे दी थी. लेकिन अब राजाभैया जियाउल हक की हत्या के मामले में फंस सकते हैं.
मामले की एक बार फिर से जांच शुरू हो सकती है. डीएसपी जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दी थी. 8 जुलाई, 2014 को सीबीआई की विशेष अदालत ने परवीन की अर्जी मंजूर करते हुए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए फिर विवेचना के आदेश दिए थे.
मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने फिर से जांच न हीं करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. इस याचिका के खारिज होते ही राजाभैया के लिए बुरे दिन शुरू हो सकते हैं.
जियाउल हक जैसे 56 इंच का जिगरा रखने वाले पुलिस अधिकारी बहुत की कम मिलते हैं. जियाउल हक अपनी इमानदारी और अपने फर्ज के लिए शहीद हुए थे. लेकिन उनकी पत्नी परवीन उनके लिए इंसाफ पाने के खातिर पिछले 8 साल से दर दर की ठोकरे खा रही है. नेताओं की तरह हो सकता है जियाउल हक को आप भी भूल गए होंगे. अखिलेश यादव जियाउल को इंसाफ क्यों न हीं दिला पाए. राजाभैया और जियाउल हक की मिस्ट्री पर आपकी क्या राय है कमेंट बाक्स में जरूर दीजिएगा.
