आगरा के पूर्व मंत्री चौधरी बशीर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. 6 शादी करने वाले पूर्व मंत्री चौधरी बशीर के खिलाफ तीन तलाक का मुकदमा दर्ज किया गया है. पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा उनकी चौथी पत्नी नगमा ने दर्ज कराया है.
आरोप है कि पूर्व मंत्री कपड़ों की तरह बीवियां बदलते हैं. पूर्व मंत्री की पत्नी नगमा का आरोप है कि चौधरी बशीर को महिलाओं के साथ अय्याशी करने का शौक रहता है. साल 2012 में उनकी शादी चौधरी बशीर से हुई थी.
शादी के बाद उन्होंने शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किए. कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए. इस मामले में चौधरी बशीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें वह 23 दिन जेल में भी रह कर आए थे. चौधरी बशीर पर आरोप लगाने वाली नगमा ने अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी अपलोड किया है.
नगमा ने पुलिस को दी जानकारी में बताया कि बशीर से उनकी शादी 11 नवंबर 2012 को हुई थी. उनके दो बेटे हैं, एक 8 साल का और दूसरा 7 साल का. नगमा का आरोप है कि शादी के बाद से ही चौधरी बशीर और उनकी बहनों ने शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न शुरू कर दिया था. परेशान होकर नगमा ने कानूनी कार्रवाई भी की थी. मामला न्यायालय में विचाराधीन है. वह तीन साल से मायके में रह रही हैं.
पुलिस का क्या कहना है?
नगमा ने पुलिस पर सुनवाई न करने के आरोप लगाए थे. इसके बाद वह एसएसपी ऑफिस पहुंचीं. एसएसपी के आदेश पर पूर्व मंत्री के खिलाफ तीन तलाक का मुकदमा दर्ज किया गया. पुलिस का कहना है कि पति-पत्नी के बीच पहले भी झगड़ा हो चुका है.
अब एक वीडियो में वह पति पर उत्पीड़न का आरोप लगा रही हैं. इसकी जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. चौधरी बशीर ने इस मामले पर अब तक कोई बयान नहीं दिया है.
बशीर पर दर्ज हैं 32 क्रिमिनल केस
चुनाव आयोग में दिए गए हलफ़नामे के मुताबिक़, चौधरी बशीर के ख़िलाफ़ 32 आपराधिक मामले लंबित हैं. वह 8वीं पास हैं. जूतों का कारोबार करते हैं. चौधरी बशीर ने पहली बार बसपा के टिकट पर 2002 में आगरा छावनी से विधानसभा चुनाव जीता था.
इसके बाद उन्होंने कानपुर की तत्कालीन विधायिक गजाला से निकाह किया. 2003 में वह पत्नी समेत सपा में शामिल हो गए. मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मंत्री पद दे दिया था.
2007 में चौधरी बशीर ने फिर चुनाव लड़ा, आगरा छावनी सीट से ही. लेकिन हार का सामना करना पड़ा. कुछ ही समय बाद उन्होंने सपा का साथ छोड़ दिया और कांग्रेस से जुड़ गए. लेकिन 2012 में टिकट नहीं मिला तो कांग्रेस का साथ भी छोड़ दिया.
साल 2014 में बसपा से चौधरी बशीर को लोकसभा का टिकट मिलने की संभावना थी. लेकिन पत्नी के साथ मारपीट के आरोप में उन्हें जेल जाना पड़ा. इसकी वजह से उनका टिकट कट गया. 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा में वापसी की.
हालांकि यह साथ भी ज्याद लंबा नहीं चला. 2019 में उन्होंने फ़िरोज़ाबाद सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नसीब नहीं हुई.

