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यूपी की ''हिंदू महिला'' और ''मुस्लिम महिलाओं'' में क्या है बच्चों का औसत ?

Tuesday, July 13, 2021 | Tuesday, July 13, 2021 WIB

 उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण क़ानून अभी लागू नहीं हुआ. इसे लेकर महज फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है, लेकिन उससे पहले इसे लेकर राजनितिक, और धार्मिक द्वन्द की शुरुआत हो चुकी है  ''भारत जब आजाद हुआ था, तब उसकी आबादी लगभग 36 करोड़ थी लेकिन पिछले 73 सालो में हमारे देश की आबादी 130 करोड़ से भी ज्यादा बढ़ गई. इसका नियंत्रण आज भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है .  






यूपी की कुल आबादी 19.98 करोड़ है. इसमें 15.93 करोड़ हिंदू, 3.84 करोड़ मुस्लिम है जो कि कुल आबादी19.26 फीसदी है.  साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक यूपी में औसतन हर महिला के 3.15 बच्चे हैं. जिनमें हिंदू महिलाओं के औसतन 3.06 बच्चे हैं, वहीं मुस्लिम महिलाओं के भी औसतन 3.6 फीसदी बच्चे हैं. 


यूपी की 44.2 फीसदी महिलाओं के 2 या 2 से कम बच्चे हैं, जिसमें 44.85 फीसदी हिंदू महिलाओं के 2 या 2 से कम बच्चे हैं, वही  मुस्लिमों 40.38 महिलाओं के 2 या 2 से कम बच्चे हैं.  ये आंकड़े बताते हैं कि बढ़ती जनसंख्या को सीधे एक धर्म के चश्मे से नहीं देखा जा सकता है. 

 




उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण क़ानून  का  सिर्फ अभी ड्रफ्ट आया  लेकिन फिर भी इसे. जनसंख्या नियंत्रण की नीति के मुकाबले, ध्रुवीकरण और अपना अपना धर्म, अपनी आबादी के विवाद में यह उलझता दिख रहा है .इस बात की  चिंता  शायद ही किसी को  होगी कि अगर जनसंख्या नियंत्रित होगी, तो आबादी संतुलित होगी, और सबको , बिजली, पानी, अस्पताल,मिल पाएंगे. फिलहाल आबादी पर नियंत्रण की नीति विकास से ज्यादा धर्म के ध्रुवीकरण में अटक गई है



राजननीतिक  उठक बैठक के बीच यूपी सरकार जो निति लेकर आ आ रही है उसके मुताबिक  अगर मुस्लिम पुरुष ने तीन विवाह किया और उसके पहली पत्नी के 2, दूसरी से 1, तीसरी से दो बच्चे हैं तो भले कुल बच्चे 2 से ज्यादा हो जाएं, लेकिन पत्नियां अधिकार से वंचित नहीं होंगी. वहीं पुरुष पर इसका असर होगा, यानी की पुरषो अलग अलग पत्नियों से जितने बच्चे होंगे सारे गिने जाएंगे. 


एक सवाल ये भी है की चुनाव से पहले आखिर जनसंख्या नियंत्रण क़ानून मसौदा लाने का मकसद क्या है ? क्या  बीजेपी इसे चुनाव में हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहती है ,  क्या और भी कोई तरीका है  जिसके जरिये जनसंख्या नियंत्रण किया जा सकता हैं? खैर कुछ भी  नेता से लेकर धर्म गुरू सभी अपने अपने चश्मे से इसे देख आरहे है 


अब सोचिए अभी जब जनसंख्या नीति का सिर्फ मसौदा आया है तो धर्म के नाम पर जुबानी लड़ाई हो रही है. अगले सात महीने में चुनाव होना है, तब क्या होगा आप सिर्फ अंदजा ही लगा सकते है  
 
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