अस्सी के दशक में न सिर्फ चंबल में (Chambal) बल्कि चंबल के बीहड़ों से लेकर पूरे देश में फूलन का खौफ था | यह वह समय था, जब फूलन का नाम सुनकर लोगों की सासे थम
जाती थी । बड़े से बड़े नेता और मंत्री भी फूलन के नाम से घबराते थे। फूलन का जन्म 10
अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के जलाऊ जिले के पुरवा गांव में हुआ था।
फूलन देवी जब मात्र 11 साल की थीं, तभी फूलन के चचेरे भाई ने उनकी शादी पुट्टी लाल नाम के एक बूढ़े से करवा दी थी जिसकी उम्र 35 के पार थी। जबकि फूलन महज 11 साल की फूलन अपने पति से उम्र में 24 साल छोटी थी, जो उम्र खेलने की होती है उस उम्र में फूलन बलत्कार यानि रेप (Rape) जैसेघिनौने आतंक की शिकार थी ।
फूलन जब 15 साल की हुई तब गांव
के ठाकुरों ने उसे अगवा किया उसे बंधक बनया और तीन हफ़्तों तक उनके माता-पिता के सामने ही फूलन का गैंगरेप(Gangrepe)
किया,
जानकारों की मानें तो ये हो हालत थे जिनहोने ने फूलन देवी को बहुत कठोर बना दिया ।
जब फूलन को काही से किसी ने सहारा नहीं दिया तो फूलन
ने अपना गैंग बनाया और 14 फरवरी 1981 को बहमई में फूलन ने एक लाइन में खड़ा करके 22 ठाकुरों
की गोली मारकर मौत की नीड़ सुला दिया, 1983 में मे उस समय की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी(Indira
Gandhi) की सरकार ने उन्हें आत्मसमर्पण(surrender)के लिए कहा, साथ ही भरोसा दिया की उन्हे नहीं दिया जाएगा
। जिसके बाद फूलन देवी अपने साथियों के साथ मध्य प्रदेश में 10 हजार जनता और तकरीबन 300 पुलिसकर्मियों के सामने अपने
आप को पुलिस के हवाले कर दिया।
आत्मसमर्पण करने के बाद फूलन देवी को 8 साल की सजा सुनाई गई, और 1994 में वह जेल से छूटकर गईं। इसके बाद उन्होंने राजनीति में एंट्री ली और फूलन दो बार सांसद भी चुनी गईं। पहली बार 1996 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट से मिर्जापुर से चुनाव लड़ा और संसद पहुंचीं।
आत्मसमर्पण करने के बाद फूलन देवी को 8 साल की सजा सुनाई गई, और 1994 में वह जेल से छूटकर गईं। इसके बाद उन्होंने राजनीति में एंट्री ली और फूलन दो बार सांसद भी चुनी गईं। पहली बार 1996 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट से मिर्जापुर से चुनाव लड़ा और संसद पहुंचीं।
आज तक नहीं चल पाया हत्या का कारण
वहीं 25 जुलाई 2001 को, जब वह 38 साल की थीं, तब दिल्ली में उनके घर के सामने उनकी हत्या कर दी गई। फूलन देवी की मौत को लेकर कई बातें सामने आईं, जिनमें से एक राजनीतिक कारणों से उनकी हत्या बताया गया। वहीं उनके पति उम्मेद सिंह पर भी उनकी हत्या का आरोप लगा, लेकिन वह साबित नहीं हो सके।
वहीं 25 जुलाई 2001 को, जब वह 38 साल की थीं, तब दिल्ली में उनके घर के सामने उनकी हत्या कर दी गई। फूलन देवी की मौत को लेकर कई बातें सामने आईं, जिनमें से एक राजनीतिक कारणों से उनकी हत्या बताया गया। वहीं उनके पति उम्मेद सिंह पर भी उनकी हत्या का आरोप लगा, लेकिन वह साबित नहीं हो सके।



