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मोदी सरकार 54 साल पुराना कानून क्यों बदल रही है? वंदे मातरम्, 1971 कानून और पूरा विवाद

Sunday, July 19, 2026 | Sunday, July 19, 2026 WIB

सीएम योगी ने जिस जोगिन्द्र नाथ माडल का नाम लेकर .. हिन्दुस्तान के हिन्दुओं को वार्निंग दी है ... क्या 79 साल बाद हिन्दुस्तान में इतिहास की वही कहानी फिर दोहराने की कोशिश हो रही है? ..सीएम योगी ने सिर्फ चेतावनी नहीं दी... उन्होंने इतिहास का ऐसा पन्ना खोल दिया,  .. जिसने .. यूपी की राजनीती में एक नयी लकीर खीच दी है ...सवाल ये नहीं की .. योगी चेतवानी दे रहे . सवाल तो ये है .की .आखिर वो कौन है, जो समाज को अलग-अलग खांचों में बांटने की राजनीति कर रहा है? और क्या  २०२६ में इतिहास फिर से लिखा जायेगा .. जिसे वर्ष १९४७ में पार्टीशन के समय जिन्ना ने  अंजाम दिया था . आखिर कौन है .. जो देश के हिन्दुओं को टुकडो में देखना चाहता .. ... और क्या योगी इसे रोक पाएंगे  चलिए इस दो मिनिट की  रिपोर्ट में समझते है ...... 



यह पहली बार नहीं जब सीएम योगी ने इस तरह की भाषा इस्तेमाल की है। इसके पहले  सितंबर 2021, कुशीनगर —में  योगी ने "अब्बा जान" वाली टिप्पणी की थी, यह कहते हुए कि पहले राशन "अब्बा जान कहने वाले" डकार जाते थे 2024, में  हरियाणा चुनाव प्रचार — के दौरान  योगी ने कहा था  "बटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो नेक रहोगे।" उन्होंने कांग्रेस पर जाति, क्षेत्र, भाषा और धर्म के नाम पर देश को बाँटने का आरोप लगाया। जनवरी 2026, में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा का हवाला देकर कहा कि जाति-मत-संप्रदाय के नाम पर बँटा समाज सर्वनाश की ओर जाता है — और सेक्युलरिज़्म का दावा करने वाले इस पर चुप हो जाते है ..18 जुलाई, 2026, बिजनौर — योगी ने सीधे जोगेंद्र नाथ मंडल का नाम लेकर दलित-मुस्लिम राजनीतिक गठजोड़ पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंटवारा कांग्रेस की देन था, इसका ख़ामियाज़ा सिखों और दलितों ने भुगता, और मंडल के फ़ैसलों की क़ीमत आज भी बांग्लादेश में दलितों को चुकानी पड़ रही है।


यानी 2021 से 2026 तक — "अब्बा जान" से "बटोगे तो कटोगे" तक, और अब "मंडल" तक — एक ही थीम बार-बार लौटती है: बँटवारे का डर, और एकता की अपील। यह बयान ठीक उस वक़्त आया है जब आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) — चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में — पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित-मुस्लिम वोटों को साथ लाने की कोशिश कर रही है। बिजनौर, सहारनपुर जैसे इलाक़ों में यह गठजोड़ बीजेपी के पारंपरिक समीकरण के लिए चुनौती बन रहा है ..



भाजपा और उसके समर्थकों का आरोप है कि यही वही दलित-मुस्लिम गठजोड़ की रणनीति है जो हिंदू समाज के भीतर की एकता को कमज़ोर करती है, ठीक वैसे ही जैसे मंडल के दौर में जाति के नाम पर एक तबक़े को मुस्लिम लीग की तरफ़ खींचा गया था। .जोगेंद्र नाथ मंडल  बंगाल के वो दलित लीडर थे  जिन्होंने 1946 में  भारत पक्सितान बटवारे के  समय ..भारत का नहीं .. पकिस्तान का साथ दिया था ..बंटवारे के बाद वे पाकिस्तान चले गए और वहाँ के पहले क़ानून मंत्री बने  .. लेकिन 1950 आते-आते वही मंडल पाकिस्तान से भाग खड़े हुए। वजह थी — पूर्वी पाकिस्तान यानी  (आज का बांग्लादेश) में हिंदुओं, ख़ासकर दलितों और सिखों पर हो रहे अत्याचार, जिन्हें रोकने में वे ख़ुद असमर्थ रहे।  या वही दलित थे ,, जो जोगेंद्र नाथ मंडल के कहने पर न सिर्फ पक्सितान में रुके बल्कि बटवारे के सामाय मुस्लिम लीग को वोट किया .. और  आज बंगलदेश और पकिस्तान में दलितों का क्या हाल .. ये  किसी से छिपा नही है ..जोगेंद्र नाथ मंडल  तो पकिस्तान से भागकर भारत aa गए थे .. लेकिन उनके फैसले की सजा आज भी वहा का दलित हिन्दू भुगत रहा है 

  

सीएम योगी ने बिजनौर में ठीक यही क़िस्सा उठाया। उन्होंने कहा कि बंटवारा कांग्रेस की देन था, जिसका ख़ामियाज़ा सिखों और दलितों ने भुगता, और मंडल के फ़ैसलों की क़ीमत आज भी बांग्लादेश में दलित समुदाय चुका रहा है।  यह बयान उन्होंने ऐसे समय दिया जब आज़ाद समाज पार्टी जैसी पार्टियाँ  दलित-मुस्लिम राजनीतिक गठजोड़ बनाने की कोशिश में हैं।  सीएम योगी कई बार ये कहा चुके है की  — बांग्लादेश में जो हिंदुओं के साथ हो रहा है, वह इस बात का सबूत है कि जाति, मत और संप्रदाय के नाम पर बँटा समाज सर्वनाश की तरफ़ जाता है। जो लोग ख़ुद को सेक्युलरिज्म का ठेकेदार कहते हैं, वे बांग्लादेश के हिंदुओं पर चुप  हो जाते .. 


एक तरफ़ मंडल का इतिहास। दूसरी तरफ़ बंटवारे की क़ीमत। तीसरी तरफ़ बांग्लादेश की मौजूदा हिंसा। और चौथी तरफ़ — आज की दलित-मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति। इन चारों को एक धागे में पिरोकर सीएम योगी यह चेतावनी दे रहे हैं — यही वजह है कि यह बयान सिर्फ़ एक ऐतिहासिक क़िस्सा नहीं रह गया — यह आज की राजनीति का हथियार बन गया है।

 

2027 में यूपी विधानसभा चुनाव होने हैं। दलित वोट बैंक — जो बसपा, सपा और अब आज़ाद समाज पार्टी के बीच बँटा हुआ है — किसी भी दल के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसे में हर बड़ा बयान चुनावी नज़रिए से भी तौला जाता है। योगी अपने बयानों से दलितों के समझना चाहते है .दलित समाज बंटवारे जैसी ऐतिहासिक ग़लतियों से सबक़ ले।  नहीं वही इतिहास फिर से दोहराया जा सकता है .. मंडल का इतिहास, बंटवारे की क़ीमत, बांग्लादेश की मौजूदा हिंसा, और आज के दलित-मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति — इन सबको एक धागे में पिरोकर सीएम योगी यह चेतावनी दे रहे हैं  तो क्या योगी सच में किसी साज़िश को रोक रहे हैं, या यह सिर्फ़ 2027 की तैयारी है? जवाब आने वाले वक़्त में साफ़ होगा। अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।  बियूरो रिपोर्ट nio टाइम्स

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