जिस आज़म ख़ान ने 4 दशकों तक रामपुर पर एकछत्र राज किया... मुलायम सिंह से लेकर अखिलेश यादव तक, हर सरकार में जिनका हुक्म ही 'कानून' था... योगी सरकार में उसी आज़म ख़ान के साम्राज्य को 100 से ज़्यादा मुकदमों और एक IAS अफ़सर की कार्रवाई ने मिट्टी में मिला दिया!....अजाम ने खुद कई साल जेल में काटे...उनकी पत्नी तज़ीन फ़ातमा और बेटा अब्दुल्लाह आज़म— को भी सलाखों के पीछे जाना पड़ा। और आज... आज़म ख़ान की वही बची-कुची विरासत भी ED के रडार पर है! ....और सिर्फ राडार पर नहीं है ..पिछले 24 घंटे में आज़म ख़ान के साथ जो कुछ हुआ है…... उसने न सिर्फ आज़म .. बल्कि उनके पूरे साम्राज्य को हिलकर रख चूका है .............................................................
दस बार विधायक, दो बार सांसद, कई बार कैबिनेट मंत्री और मुलायम सिंह यादव के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक...आज़म आज सलाखों के पीछे दिन का काट रहे है...जिस जौहर यूनिवर्सिटी को उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी विरासत के तौर पर खड़ा किया था,.. उसे बुडोज करने की प्लानिंग हो रही .. और सिर्फ पल्निंग ही नहीं .. एक बार तो आदेश भी हो चूका है ...यानि कहानी सिर्फ .. आज़ाम की नहीं .. उनके साम्राज्य के अंत की भी है ..........
लेकिन सवाल यह नहीं है कि आज़म ख़ान का साम्राज्य खत्म कैसे हुआ… सवाल है—उसे खत्म कौन कर रहा है? आखिर कौन है जिसने उस आज़म ख़ान के चार दशक पुराने सियासी वर्चस्व को रामपुर में चुनौती दी, जिसके सामने कभी बड़े-बड़े अफसरों के लिए खड़ा होना आसान नहीं था? क्या ये सिर्फ कानून और अदालत की कार्रवाई है… या फिर इसके पीछे उत्तर प्रदेश की सत्ता में बैठा वो चेहरा है, जिसने 2017 में मुख्यमंत्री बनते ही साफ कर दिया था कि अब रामपुर में सत्ता का पुराना हिसाब नहीं चलेगा? नाम है—योगी आदित्यनाथ।
2017 में योगी सत्ता में आए… और इसके बाद आज़म ख़ान की राजनीति का सबसे मुश्किल दौर शुरू हुआ । लेकिन योगी ने आज़म से खुद जाकर लड़ाई नहीं लड़ी। असली लड़ाई जमीन पर प्रशासन ने लड़ी। और 2019 में योगी सरकार ने रामपुर में एक ऐसे IAS अधिकारी को DM बनाकर भेजा, जिसने सीधे उस इलाके की कमान संभाली जहां दशकों से आज़म का राजनीतिक प्रभाव था। लेकिन दिलचस्प बात ये थी .. की .जिस अफसर को योगी सरकार ने आज़म के गढ़ रामपुर की कमान दी थी , उसे उत्तर प्रदेश में लेकर योगी नहीं आए थे। वो सिक्किम कैडर के IAS आंजनेय कुमार सिंह 2015 में अखिलेश यादव सरकार के दौरान inter-cadreडेप्युटेशन पर उत्तर प्रदेश आए थे। और फरवरी 2019 में योगी सरकार ने उन्हें रामपुर का DM बनाया।
यानी अखिलेश सरकार के दौर में उत्तर प्रदेश आया एक आईएस अफसर… योगी सरकार में उसी सरकार में रहे आज़म ख़ान के वर्चस्व को चुनौती देने वाला सबसे चर्चित चेहरा बन गया।..... और यही से आज़म ख़ान के चार दशक पुराने वर्चस्व के अंत की शुरुआत हुई?.....आंजनेय कुमार सिंह के रामपुर पहुँचने के कुछ ही महीनों बाद आज़म के खिलाफ जमीन से लेकर जौहर यूनिवर्सिटी तक पुराने विवादों की फाइलें खुलने लगीं।, मुकदमे दर्ज होने लगे और देखते ही देखते आज़म के खिलाफ मामलों की संख्या 100 के पार पहुँच गई।
जिस रामपुर में कभी आज़म की राजनीतिक ताकत के किस्से सुनाई देते थे, अब वहीं उनकी जमीन, उनकी यूनिवर्सिटी और उनके फैसलों की जांच हो रही थी। और बात सिर्फ जांच तक नहीं रुकी… फरवरी 2020 में आज़म ख़ान को सलाखों के पीछे जाना पड़ा। । आज़म करीब 27 महीने जेल में रहे और मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद बाहर आए। लेकिन आज़म की जेल यात्रा यहीं खत्म नहीं हुई। अक्टूबर 2023 में उन्हें फिर जेल जाना पड़ा और इस बार करीब 23 महीने सलाखों के पीछे रहने के बाद 23 सितंबर 2025 को उनकी रिहाई हुई। लगा कि लगभग दो साल बाद आज़म की जिंदगी अब जेल से बाहर लौटेगी… लेकिन दो महीने भी पूरे नहीं हुए थे कि नवंबर 2025 में दो PAN Card मामले में सात साल की सजा सुनाए जाने के बाद आज़म फिर जेल पहुँच गए। और मई 2026 में इसी मामले में उनकी सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई। यानी पिछले छह वर्षों में आज़म की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा सत्ता के गलियारों में नहीं… जेल, जमानत और अदालतों के बीच गुजरा है।..........
लेकिन योगी सरकार की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। आज़म की सबसे बड़ी राजनीतिक विरासत मानी जाने वाली जौहर यूनिवर्सिटी भी कार्रवाई के केंद्र में आ गई। 2026 में इसकी 38 इमारतों को लेकर demolition order तक जारी हुआ, हालांकि बाद में उस कार्रवाई पर रोक लगी। और अब पिछले 24 घंटे में कहानी एक कदम और आगे बढ़ चुकी है—ED ने आज़म के जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली के 10 ठिकानों पर छापेमारी की है।
लेकिन शायद कहानी का सबसे बड़ा सवाल ये नहीं की ईडी ने कार्यवाही सवाल तो इस बात का है की —क्या योगी सरकार ने आज़म ख़ान की सिर्फ राजनीतिक ताकत खत्म की है… या अब निशाना उस विरासत पर है, जिसे आज़म अपने बाद भी रामपुर में छोड़ जाना चाहते थे? क्योंकि आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज़म जेल में हैं… उनका बेटा भी सलाखों के पीछे है… परिवार कानूनी लड़ाइयाँ लड़ रहा है… और जिस जौहर यूनिवर्सिटी को कभी आज़म के बढ़ते वर्चस्व की निशानी माना जाता था, आज उसी की इमारतों पर demolition का खतरा है और उससे जुड़े मामलों में ED तक की एंट्री हो चुकी है।................ वैसे आप को क्या लगता है ......

