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G-7 में पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका की 'बड़ी साजिश' और 'नए भारत' का करारा जवाब!

Thursday, June 18, 2026 | Thursday, June 18, 2026 WIB

 पीएम मोदी ने... फ्रांस की धरती पर... अमेरिका के साथ जो किया...वो न तो पहली बार था... और ना आखिरी बार... लेकिन... G-7 की मीटिंग में जो हुआ... वो कूटनीति के इतिहास में शायद पहली बार था।  खुद को दुनिया का बॉस समझने वाले अमेरिका की मिसाइलों से जब भारत के तीन बेगुनाह नागरिकों की जान गयी तो पूरी दुनिया को लगा कि भारत चुप रहेगा...क्योंकि सामने अमेरिका है ..लेकिन...फ्रांस की धरती पर... G-7 के मंच से... हिंदुस्तान ने पूरी दुनिया को एक बार फिर बता दिया कि भारत अब सिर्फ सुनता नहीं... जवाब भी देता है।......... तो क्या PM Modi ने G7 के मंच से Donald Trump के सामने America का नाम लिए बिना जो कहा, क्या वह सिर्फ एक statement था या diplomatic warning? और Modi-Trump की अहम meeting से ठीक पहले America ने Indo-Pacific Command से “Indo” शब्द क्यों हटा दिया? क्या यह सिर्फ संयोग था? या India को दिया गया एक symbolic message?  चलिए इस रिपोर्ट में समझते है ? 



10 जून के आसपास, ओमान के तट के पास... एक कमर्शियल तेल टैंकर MT Settebello आगे बढ़ रहा था. जहाज पर 24 भारतीय crew members थे. ये सैनिक नहीं थे. ये किसी युद्ध का हिस्सा नहीं थे. ये वो लोग थे जो दुनिया की energy supply चलाते हैं,  MT Settebello' समंदर का सीना चीरते हुए आगे बढ़ रहा था। तभी अचानक, अमेरिकी military strike होती है. हमले में जहाज के इंजन रूम के परखच्चे उड़ जाते है । 21 लोगों को तो बचा लिया गया,  लेकिन इस क्रूर  अमेरिकी हमले में तीन भारतियों  की जान चली गयी ....अमेरिका का आरोप था कि यह जहाज इरानियन ऑयल ब्लॉकेड को violate कर रहा था. 


लेकिन भारत के लिए सवाल सिर्फ इतना नहीं था कि जहाज ने blockade तोड़ा या नहीं. सवाल यह था: अगर भारत का strategic partner ही भारतीय नागरिकों की मौत का कारण बने... तो भारत जवाब कैसे देगा? इस घटना के बाद भारत में सियासी तूफान शुरू हो गया. विपक्ष ने सरकार से सवाल पूछा:की जब अमेरिका  strike में  भारतीय मारे गए  तो प्रधानमंत्री मोदी चुप क्यों हैं? क्या भारत अमेरिका के दबाव में है? ...


लेकिन diplomacy हमेशा शोर-शराबे से नहीं, सही वक्त पर सही वार से चलती है। कई बार जवाब press conference में नहीं, global मंच पर दिया जाता है. और यही हुआ इस मामले में भी  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बात कर भारत की आपत्ति दर्ज कराई.. लेकिन असली 'मास्टरस्ट्रोक' तो फ्रांस में G-7 के मंच पर पीएम मोदी ने चला ....


पीएम मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा— स्ट्रेट ऑफ़ 'होर्मुज में समुद्री व्यापार में आ रही बाधाओं ने सिर्फ इकॉनमी को नुकसान नहीं पहुँचाया, बल्कि इस संघर्ष में हमारे कई भारतीय नागरिकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है।'पीएम मोदी ने  कहा 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और हमारे नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।'  यह एक सामान्य statement नहीं था. यह diplomatic signal था. पीएम मोदी ने भले ही अमेरिका का नाम नहीं लिया 

लेकिन  इशरा अमेरिका की तरफ ही था .—  सन्देश  साफ़ था की भारत अब किसी सुपरपावर का जूनियर पार्टनर नहीं है, बल्कि अपने फैसले खुद लेने वाला देश है ..  .. और इसकी बानगी पूरी दुनिया  फ़्रांस में देख चुकी है ...... 


लेकिन यह पहली बार नहीं था जब फ्रांस की धरती पर भारत ने अमेरिका को उसकी सीमा याद दिलाई हो.अगस्त 2019. में जब Article 370 हटने के बाद Kashmir पर दुनिया की नजर थी. तब Donald Trump बार-बार mediation की बात कर रहे थे. अमेरिका खुद को बीच में लाना चाहता था. लेकिन Trump के ठीक बगल में बैठकर PM Modi ने साफ कर दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच मुद्दे bilateral हैं. किसी तीसरे देश की जरूरत नहीं. उस दिन मुद्दा Kashmir था. और 2026 में मुद्दा इंडियन सीफेयरर्स  की जान का है . लेकिन दोनों बार message एक जैसा था: भारत दोस्ती करेगा, लेकिन अपनी सोवरेनिटी और अपने नागरिकों की सुरक्षा पर compromise नहीं करेगा. 


पीएम मोदी के इस बयांन के बाद  वही हुआ जिसका अंदाजा पहले से था .. Modi-Trump की अहम bilateral meeting से ठीक पहले,  अमेरिका  ने U.S. Indo-Pacific Command का नाम बदलकर फिर से U.S. Pacific Command कर दिया. 2018 में Trump के पहले कार्यकाल में इसी command के नाम में “Indo” जोड़ा गया था. तब इसे India की बढ़ती strategic importance और Indian Ocean-Pacific Ocean की connected security reality से जोड़कर देखा गया था.


लेकिन अब, जब Indian seafarers की मौत पर India-US relations pressure में थे, जब Jaishankar ने strong protest दर्ज कराया था, जब Modi ने G7 मंच से seafarers की safety का मुद्दा उठाया था, और जब 17 जून 2026 को Modi-Trump की अहम बैठक होनी थी, उसी समय America ने “Indo-Pacific” से “Indo” शब्द हटा दिया.

   

एक तरफ America भारत को strategic partner कहता है. दूसरी तरफ इंडियन सीफेयरर्स की मौत पर apology नहीं देता. और फिर tension के बीच अपनी बड़ी regional military command से “Indo” शब्द हटा देता है. तो सवाल उठना स्वाभाविक था: क्या यह सिर्फ नाम बदलना था? या India को message देने की कोशिश थी कि America अपनी strategy में India को पहले जैसी जगह नहीं देना चाहता?

 

भारत इस symbolism को हल्के में नहीं लेता. क्योंकि America की Seventh Fleet को भारत 1971 की जंग के संदर्भ में आज भी एक pressure tactic के रूप में याद करता है. इसलिए France में PM Modi का statement सिर्फ तीन seafarers की मौत पर reaction नहीं था. यह एक बड़े ट्रस्ट डेफिसिट t के बीच दिया गया जवाब था.

 

कूटनीति में कभी-कभी एक शब्द missile से भी  ज्यादा दूर तक जाता है. PM Modi ने America का नाम नहीं लिया, लेकिन maritime सुरक्षा, Indian lives और fear-free seafaring की बात उसी कमरे में उठाई जहां Donald Trump मौजूद थे. भारत अब सिर्फ सुनता नहीं. जवाब भी देता है. और जब बात अपने नागरिकों की हो... तो जवाब सही वक्त पर, सही मंच से, और सही भाषा में दिया जाता है.




 

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