हिंदुस्तान के इतिहास में शायद पहली बार! किसी अदालत ने एक साथ 9 पुलिसवालों को मौत की सजा सुनाई है ! मद्रास की मदुरै सेशन कोर्ट ने कस्टोडियल किलिंग मामले में वो ऐतिहासिक फैसला सुनाया है .जिसने जस्टिस का एक नया इतिहास लिख दिया ... CBI की 2,000 पन्नों की चार्जशीट, DNA रिपोर्ट और एक महिला कांस्टेबल का वो सच... जिसने खाकी के रक्षकों को भक्षक बना दिया। आखिर क्यों कोर्ट ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' केस माना? चलिए समझते है इस एक विडियो में ..
तारीख 19 जून 2020. जगह तमिलनाडु का एक छोटा सा कस्बा सथानकुलम। लॉकडाउन का समय था। शाम के सवा आठ बज रहे थे। एक 58 साल के दुकानदार जयराज और उनके 31 साल के बेटे बेन्निक्स को पुलिस सिर्फ इसलिए उठा ले जाती है क्योंकि उनकी मोबाइल की दुकान तय समय से 15 मिनट ज्यादा खुली रहती है। किसी ने नहीं सोचा था कि ये 15 मिनट की देरी, एक बाप बेटे की मौत का वारंट बन जाएगी।
CBI की 2,027 पेज की मुख्य और 400 पेज की सप्लीमेंट्री चार्जशीट कहती है की। फोरेंसिक रिपोर्ट में थाने की दीवारों, फर्श, लाठी और टॉयलेट से मिले ब्लड सैंपल्स का DNA जयराज-बेन्निक्स से मैच हुआ—उस रात शाम 7:45 से लेकर सुबह 3:00 बजे तक—यानी 8 घंटे से ज्यादा तक जयराज और बेन्निक्स को पीटा गया
उस रात जो हुआ, वो किसी भी सभ्य समाज की कल्पना से परे था। सीबीआई की चार्जशीट कहती है कि पिता-पुत्र को निर्वस्त्र किया गया। घंटों तक उन पर लाठियां बरसाई गईं। जब वो दर्द से कराहते, तो उनकी आवाज़ दबाने के लिए पुलिसवाले खुद शोर मचाते। जयराज ने अपने ब्लड प्रेशर का हवाला देकर रहम की भीख मांगी, लेकिन उन वर्दीधारियों के दिल नहीं पसीजे।"
अगले दिन जब उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने ले जाया गया, तो वो अपने पैरों पर खड़े तक नहीं हो पा रहे थे। उनके कपड़े खून से लथपथ थे। हद तो तब हो गई जब मजिस्ट्रेट डी. सरवनन ने अपनी बालकनी से ही इशारा कर दिया और बिना उनकी हालत देखे उन्हें 100 किलोमीटर दूर कोविलपट्टी जेल भेज दिया। पुलिस ने झूठ बोला कि उन्होंने लॉकडाउन तोड़ा और विरोध किया, जिस वजह से उन्हें चोटें आईं। लेकिन हकीकत ये थी की उन्हें बड़ी ही बेरहमी से पिटा गया था ..उनकी हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि शरीर ने जवाब दे दिया। और 22 जून को बेन्निक्स और 23 जून को जयराज ने दम तोड़ दिया। एक परिवार ने एक ही रात में अपने घर के दो चिराग खो दिए। पुलिस को लगा कि मामला दब जाएगा... लेकिन ऐसा ह़ा नहीं !
पुलिस ने इसे 'लॉकडाउन उल्लंघन' का मामूली केस बता रही थी, लेकिन जनता का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। जस्टिस फॉर जयराज एंड बेन्निक्स ग्लोबल ट्रेंड बन गया। शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने सबूत मिटाने की कोशिश की। सीसीटीवी फुटेज गायब कर दिए । लेकिन एक महिला कांस्टेबल, रेवती, ने हिम्मत दिखाई और मजिस्ट्रेट के सामने सच उगला। मामला CBI को सौंपा गया। जाच शुरू हुई .और जो सच निकल कर सामने आया उसने सबको हिला कर रख दिया ..CBI की 2,027 पेज की रिपोर्ट ने साबित किया कि यह 'आत्मरक्षा' नहीं, बल्कि 'कोल्ड ब्लडेड मर्डर' था।
यह कोई मामूली केस नहीं था। 100 से ज्यादा गवाह, 5 साल से ज्यादा का लंबा ट्रायल और CBI की दो-दो चार्जशीट। के बाद 6 अप्रैल 2026. को मदुरै सेशन कोर्ट ने ये कहते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई की 'यह सामान्य हत्या नहीं है। यह रक्षक के भक्षक बनने की कहानी है। ये सिर्फ मारपीट नहीं थी, ये 'प्री-प्लान्ड टॉर्चर' था। कोर्ट ने इसे Rare of the Rarest: केस कहा है . सजा सिर्फ फांसी तक सीमित नहीं रही। वैसे तो कुल 10 आरोपी थे, लेकिन 1 की COVID से पहले ही मौत हो चुकी था..कोर्ट बचे हुए इन 9 पुलिसवालों पर 1.40 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जज ने साफ कर दिया कि अगर ये रकम नहीं चुकाई गई, तो इन पुलिसवालों की निजी संपत्ति कुर्क की जाएगी।
भारत के इतिहास में ये शायद पहली बार, है जब एक साथ 9 पुलिसवालों को फांसी की सजा सुनई गयी । यह फैसला सिर्फ एक परिवार की जीत नहीं है, बल्कि उस हर नागरिक की जीत है जो वर्दी के रूतबे के आगे खुद को बेबस महसूस करता है। यह केस सिर्फ दो मौतों का नहीं है। यह सवाल है हमारे सिस्टम पर है । क्या वर्दी आपको कानून से ऊपर होने का लाइसेंस देती है? 9 पुलिसकर्मियों को एक साथ फांसी की सजा मिलना यह संदेश है कि 'कानून के हाथ लंबे होते हैं', चाहे अपराधी खाकी में ही क्यों न हो। क्या आपको लगता है कि इस फैसले से कस्टोडियल टॉर्चर रुकेगा? अपनी राय कमेंट्स में बताएं। जयराज और बेन्निक्स के संघर्ष को याद रखने के लिए इस वीडियो को शेयर करें। सत्यमेव जयते। मिलते हैं अगले वीडियो में।"
आज़ाद भारत का सबसे बड़ा फैसला: JASTIS NE DEE 9 पुलिसकर्मी, 1 साथ फाँसी

