जिस पूजा पाल ने कभी समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा... जिन्होंने 2017 से पहले बसपा और फिर 2019 में सपा के टिकट पर अपनी सियासी जमीन तैयार की।आज वही पूजा पाल, खुलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में खड़ी हो गई हैं! लेकिन सवाल ये नहीं कि पूजा पाल आज सीएम योगी का समर्थन कर रही हैं... सवाल तो ये है कि उनके निशाने पर वो अखिलेश यादव क्यों हैं जिनके टिकट पर 2022 में पूजा पाल तीसरी बार विधायक बनी...क्या इसके पीछे योगी सरकार में उनके पति राजू पाल के हत्यारों को मिली सजा है... या फिर पर्दे के पीछे बीजेपी ने पूजा पाल के लिए कोई 'सीक्रेट प्लान' तैयार कर लिया है? चलिए इस दो मिनिट की रिपोर्ट में आपको समझते है .....
पूजा पाल आज क्यों अखिलेश यादव के विरोध में क्यों खडी है .ये आपको बताएँगे .लेकिन उससे पहले ..ये जान लीजिये आज से कुछ महीनो पहले मोदी और योगी की उस बैठ में क्या हुआ .. जिसके बाद पूजा पाल के निशने पर अखिलेश यादव आ गए .. पूजा पाल का बीजेपी के करीब आना और योगी आदित्यनाथ के लिए सियासी मैदान में खुलकर बैटिंग करना ये महज एक इत्तेफाक नहीं, है बल्कि 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी का ये वो चक्रव्यूह है ..जिसकी शुरुवात अभी से शुरू हो गयी है .......दवा है की कुछ महीने पहले ही दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हुई डेढ़ घंटे की मैराथन बैठक, में पूजा पाल की भूमिका तय कर दी गयी थी ...
योगी जानते हैं कि अगर अखिलेश यादव के 'PDA' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले को तोड़ना है, तो पूजा पाल जैसी निडर महिला राजनेता को आगे लाना होगा। लेकिन इसकी शुरुआत इस तरह से होगी, ये किसी ने सोचा भी नहीं था। यह उस बिसात की पहली चाल थी जिसे विपक्षी खेमा समझ ही नहीं पाया।अब सवाल ये कि पूजा पाल के निशाने पर सीधे अखिलेश यादव ही क्यों हैं? इसका जवाब छुपा है 2005 के उस खूनी इतिहास में जब शादी के सिर्फ़ 9 दिन बाद ही पूजा पाल को विधवा बना दिया गया था ..
उनके पति राजू पाल की बीच सड़क पर सरेआम हत्या कर दी गई। यह सिर्फ एक राजनीतिक मर्डर नहीं था, यह पूजा पाल के वजूद को मिटाने की कोशिश थी। उस वक्त उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। आरोप लगे कि सत्ता के संरक्षण में पल रहे माफिया अतीक अहमद के इशारे पर इस कांड को अंजाम दिया गया। उस वक्त की सत्ता ने पूजा पाल को एक 'बेबस विधवा' समझकर उसे उसके हाल पर छोड़ दिया। फाइलों को दबाया गया, गवाहों को डराया गया और न्याय का सरेआम गला घोंटा गया।
सियासत की बिसात पर पूजा पाल ने अपना पहला कदम यहीं से बढ़ाया—उन्होंने माफियाओं की आँखों में आँखें डालकर अपने पति के हक की लड़ाई लड़ी। पूजा पाल 3 बार विधायक बनीं, दो बार बसपा से और एक बार सपा से। उसी सपा से जिसकी सरकार में उनके पति की ह्त्या हुई थी ..सालों तक उसी का हिस्सा रहने के बाद भी उन्हें वो सम्मान और पद नहीं मिला जिसकी वो हकदार थीं। ...उन्हें विधायक तो बनाया गया, लेकिन उनकी आवाज को हमेशा माफिया के रसूख और वोट बैंक की राजनीति के नीचे दबाकर रखा गया। पूजा पाल एक ऐसी घुटन में जी रही थीं, जहाँ उन्हें अपने ही पति के हत्यारों के मददगारों के साथ मंच साझा करना पड़ता था।
लेकिन जब 2017 में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कमान संभाली, तो हवा का रुख बदला। पूजा पाल समझ गईं कि जो न्याय उन्हें अदालतों और सपा के दफ्तरों में नहीं मिला, वो योगी जी का 'बुलडोजर' सड़क पर कर रहा है। जब अतीक अहमद जैसे माफिया का किला ढहा, तो पूजा को अहसास हुआ कि असली 'संरक्षक' अखिलेश नहीं ..योगी अदिय्नाथ है ...उन्होंने खुलकर सीएम योगी की तारीफ की। नतीजा ये हुआ की ? उन्हें सपा से निष्कासित कर दिया गया।
यही वजह है कि आज वो अखिलेश के खिलाफ और योगी के साथ चट्टान की तरह खड़ी हैं। आज वो डंके की चोट पर कहती हैं— 'अतीक अहमद सपा का सबसे बड़ा फाइनेंसर था, समाजवादी पार्टी को अतीक अहमद की सारी गतिविधियों की जानकारी थी, लेकिन अतीक पर की गई कार्रवाई अखिलेश यादव को पसंद नहीं आई। अतीक अहमद के रूप में समाजवादी का एक बड़ा फाइनेंसर मारा गया ,जिससे अखिलेश यादव असंतुष्ट थे।....
पूजा पाल ने कहा- यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ धुरंधर सीएम हैं। उन्होंने अतीक, मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं का अंत किया। अगर मैं अतीक की हत्या होने के बाद भी जीवित हूं या रह सकी हूं, तो इसकी एकमात्र वजह है, सीएम योगी आदित्यनाथ .. अगर अखिलेश यादव की सरकार होती या वो मुख्यमंत्री होते, तो अब तक मेरी हत्या हो गई होती। उनका ये हमला सीधा अखिलेश के उस सिस्टम पर है जिसने माफिया को 'माननीय' बनाया। ..
यह बयान उस खौफ और उस सच्चाई की गवाही है जिसे पूजा पाल ने दो दशकों तक जिया है। बीजेपी की चाल और पूजा पाल का प्रतिशोध मिलकर 2027 की नई पटकथा लिख रहे हैं। वैसे आपको क्या लगता है? क्या पूजा पाल को मंत्री बनाकर योगी जी ने 2027 की बाजी अभी से जीत ली है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें। देखते रहिए NIO TIMES।"
