असम इलेक्शन से पहले Amit Shah के एक बयान ने उन घुसपैठियों के बीच हलचल बढ़ा दी है…जो घुसपैठ के जरिये भारत को इस्लामिक रष्ट्र बानने का सपना देख रहे थे ... और ये बयान ऐसे समय में आया है…जब हिमंता सरमा पहले ही 'मियां मुस्लिमों' के खिलाफ फ्रंटफुट पर खेल रहे है , और अब शाह के इस मास्टरस्ट्रोक ने असाम की सियासत का पूरा खेल पलट दिया है। तो क्या ये सिर्फ अमित शाह का चुनावी बयान है? या फिर…एक बड़े ऑपरेशन की शुरुआत?...चलिए इस एक रिपोर्ट में समझते है .......
असम…सिर्फ एक स्टेट नहीं… बल्कि भारत की पहचान का वो फ्रंटलाइन। जहां चुनाव सिर्फ सरकार बदलने के लिए नहीं होते…बल्कि ये तय करते हैं कि आने वाली पीढ़ियां किस संस्कृति और पहचान के साथ जिएंगी।.. एक तरफ वो ताकतें हैं जो घुसपैठ के जरिए भारत की जनसांख्यिकी को बदलकर एक खास एजेंडे की ओर ले जाने का सपना देख रही हैं.. दूसरी तरफ है हेमन्त शर्मा का एक्शन और अमित शाह का वो एलान है जिसने घुसपैठियों के मंसूबे की नींव हिला दी है! ....
जब देश की सीमाएं असुरक्षित है असम की जमीन पर 'अघोषित कब्जा' हो रहा है ,तब ऐसे वक्त में असम के सीएम शर्मा तुष्टिकरण की राजनीति को कुचलकर असंम में एक नया इतिहास लिखने की कोशिश कर रहे है ..और उस कोशिश में अमित शाह की भी एंट्री हो चुकी है . सीएम शर्मा श्याद देश के पहले सीएम होंगे जिन्होंने घुसपैठियों को देखते ही गोली मारने यानी (Shoot-at-sight) का आदेश दिया..जिन पर मिया मुस्लिमानो के लिए eviction drives चलाने के आरोप लगा .. जिन्होंने Polygamy एक्ट लाकर शरियत एक्ट को चुनौती दी..अब वही हिमंत बिस्वा सरमा.. देश के ग्रह मंत्री अमित शाह का साथ मिल गया है ...
अमित शाह ने असाम की एक रैली में एलान कर दिया की ..अवैध घुसपैठियों की लिस्ट तैयार हो चुकी है! अमित शाह ने जनवरी 2026 में असम के 7 जिलों में 64 लाख घुसपैठिए होने का दावा किता था .और अब अप्रैल 2026 में घुस्पैतियों की लिस्ट टायर होने की बात कर रहे है ... अमित शाह का रहे है की पूरे देश से एक एक घुसपैठियों चुन चुनकर देश से बाहर निकला जाएगा ..सिर्फ वोटर लिस्ट से नाम हटाना काफी नहीं होगा .हिमंता सरमा सरकार पहले ही तकरीबन 1.25 लाख एकड़ जमीन मुक्त कर चुकी है, और अगले 5 साल में हर घुसपैठिए को पहचानकर देश बाहर फेक दिया जाएगा ...
यह सिर्फ एक बयान नहीं, उन लोगों के लिए 'डेथ वारंट' है जो असम की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी एजेंडे के लिए करना चाहते थे। जब शाह कहते हैं कि लिस्ट तैयार है, तो इसका सीधा मतलब है कि अब पहचान की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है और अब बारी 'एक्शन' की है। असम में पिच पहले से ही तैयार थी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा 'मियां मुस्लिमों' के तुष्टिकरण के खिलाफ पहले ही फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं। चाहे वो सरकारी स्कूलों से शुक्रवार की छुट्टी खत्म करना हो, या लैंड जिहाद के खिलाफ कड़े कानून—हिमंता ने साफ कर दिया है कि असम अब 'सॉफ्ट टारगेट' नहीं रहेगा। और अब, अमित शाह के इस मास्टरस्ट्रोक ने हिमंता की उस लड़ाई को ब्रह्मास्त्र दे दिया है।
असम के 35 में से 8 जिले – यानी 23% एरिया – अब मुस्लिम बहुल! हो चुके है .जिनमे धुबरी (79%), बारपेटा (70%), हैलाकांडी (66%) टॉप पर है ..ये बदलाव प्राकृतिक नहीं है, बल्कि योजनाबद्ध घुसपैठ का नतीजा है। जिन इलाकों में कभी असंम संस्कृति की गूंज थी, वहां आज मंजर कुछ और है। शाह का बयान ठीक उसी नस पर चोट करता है, जहां से भारत को कमजोर करने की साजिश रची जा रही थी।
इस एक बयान ने असम की सियासत का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। विपक्ष जिसे अब तक अपना 'वोट बैंक' मानकर बैठा था, उस बैंक की चाबी अब केंद्र सरकार के हाथ में है। घुसपैठियों के बीच मची ये हलचल बता रही है कि इस बार चुनाव सिर्फ सरकार चुनने के लिए नहीं, बल्कि असम को 'स्वदेशी' बनाए रखने के लिए लड़ा जाएगा। तो क्या अमित शाह की ये लिस्ट असम से घुसपैठ का जड़ से खात्मा कर पाएगी? क्या हिमंता शर्मा की मिया विरोधी पोल्तिक्स 2026 में जीत दिला पायेगी ... नतीजा चाहे जो भी हो लेकिन एक बात साफ है—अब असम की जमीन पर 'एजेंडा' नहीं, सिर्फ 'कानून' चलेगा। और इसके संकेत .. अमित शाह और हिम्न्ता दोनों ने डे दिया है ..: आपको क्या लगता है, क्या इस लिस्ट के बाद घुसपैठियों के दिन अब गिनती के रह गए हैं? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं। देखते रहिए NIO TIMES।

