फतेहपुर में अवैध खनन का खेल अब 'चोर-सिपाही' से आगे बढ़कर 'सत्ता और सिंडिकेट' की जंग बन चुका है। प्रशासन जुर्माना लगाता है, एसटीएफ (STF) रेड डालती है, लेकिन यमुना की जलधारा में गरजती मशीनें शांत नहीं होतीं। आज की स्पेशल रिपोर्ट में हम बेनकाब करेंगे उस नेटवर्क को, जो पुलिस की ही जासूसी करता है और जानेंगे कि 53 लाख के जुर्माने के बाद भी संगोलीपुर में खनन माफिया बेखौफ क्यों हैं?
कहानी की शुरुआत होती है किशनपुर थाना क्षेत्र की संगोलीपुर खदान से। यहाँ यमुना की लहरों को रोककर और धारा को मोड़कर 'बड़ी-बूम' (Big-Boom) मशीनों से दिन-रात खनन जारी है। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए जीपीएस (GPS) वीडियो और ऑडियो क्लिप ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। वीडियो: इसमें साफ दिख रहा है कि जिन तिथियों में खनन प्रतिबंधित था, उस दौरान भी जलधारा के बीच भारी मशीनें गरज रही थीं।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि खदान संचालक ने अपनी मनमानी की सारी हदें पार कर दी हैं।बिना मुआवज़े के किसानों की भूमिधरी ज़मीन को कुचलकर जबरन रास्ते बनाए जा रहे हैं सीसीटीवी से छेड़छाड़: खदान में लगे सीसीटीवी कैमरों की दिशा जानबूझकर बदल दी गई है ताकि अवैध गतिविधियों को 'तीसरी आँख' से छिपाया जा सके। ओवरलोडिंग का खेल: धर्मकांटे केवल दिखावे के लिए हैं, हकीकत में ओवरलोड वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं।
एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें कथित तौर पर एक अधिवक्ता को, जो अपनी जमीन से रास्ता रोके जाने का विरोध कर रहा था, पुलिस और खदान संचालक द्वारा 'कानून' का पाठ पढ़ाया जा रहा है। यहाँ किसानों की फसलें रौंदकर जबरन रास्ता बनाया जा रहा है, और विरोध करने पर उन्हें ही मुकदमों का डर दिखाया जाता है। एक वायरल ऑडियो में, जो कथित तौर पर किशनपुर थानाध्यक्ष और एक पीड़ित अधिवक्ता सूरज मिश्रा बीच का है, तीखी नोकझोंक सुनाई दे रही है। इसमें अपनी ही ज़मीन से रास्ता रोके जाने पर अधिवक्ता को पुलिसिया कार्रवाई और मुकद्मे की धमकी दी जा रही है। उसे गलिया दी जा रही है ?
यह दुस्साहस तब है, जब अभी हाल ही में प्रशासन ने जिले में अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक चोट की थी। जब डीएम रविंद्र सिंह और एडीएम अविनाश त्रिपाठी ने 53 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना चार पट्टेधारकों (कोर्रा, अढ़ावल-10, ओती और मझगवा खदान) पर लगाया था। प्रशासन ने सोचा था कि इससे माफिया डर जाएंगे। लेकिन संगोलीपुर के हालात बता रहे हैं कि माफियाओं के लिए 53 लाख महज 'बिजनेस कॉस्ट' है, खौफ नहीं।
यमुना की लहरों के बीच नियमों को ताक पर रखकर चल रहा 'काला खेल' एक बार फिर उजागर हुआ है। जहाँ एक तरफ प्रशासन अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस का दावा करता है, वहीं किशनपुर थाना क्षेत्र की संगोलीपुर खदान में माफियाओं का दुस्साहस सातवें आसमान पर है। यहाँ न तो एनजीटी (NGT) के नियम माने जा रहे हैं और न ही किसानों की फरियाद सुनी जा रही है। माफिया बेखौफ क्यों है?
इसका जवाब यूपी एसटीएफ (STF) की हाल ही में हुई कार्रवाई डे चुकी है । की कैसे फतेहपुर में एक समानांतर 'जासूसी नेटवर्क' चल रहा है। इसे ऐसे समझिये की पिछले दिनों पार्थ ढाबा संचालक समेत 11 लोकेटरों और वाहन मालिकों पर एफआईआर दर्ज हुई है। ये लोग अधिकारियों (SDM/CO) की गाड़ियों का पीछा करते हैं और 'लाइव लोकेशन' खनन माफियाओं को भेजते हैं।
संगोलीपुर हो या अन्य खदानें, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के मानकों का पालन सिर्फ फाइलों में हो रहा है: जलधारा से छेड़छाड़: NGT के अनुसार नदी की धारा रोकना अपराध है, लेकिन यहाँ मशीनें नदी के बीच खड़ी हैं। नदी तल में भारी पोकलैंड प्रतिबंधित है, फिर भी इनका खुला प्रयोग हो रहा है। सीसीटीवी और जीपीएस: कैमरों की दिशा बदल दी जाती है और जीपीएस को चकमा देने के लिए 'लोकेटर गैंग' (Human Intelligence) का इस्तेमाल होता है। धूल रोकने के लिए छिड़काव नहीं होता और ओवरलोडिंग से सड़कें बर्बाद हो रही हैं।
फतेहपुर में अवैध खनन का यह खेल अब सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध है। एक तरफ 53 लाख का जुर्माना, दूसरी तरफ एसटीएफ की रेड, और इन सबके बीच निडर होकर चलता संगोलीपुर का अवैध खनन। बड़ा सवाल यह है:

