दिल्ली में बनना था आम आदमी पार्टी का मेयर लेकिन कुछ देर पहले ही हाथापाई शुरू हो गई. केजरीवाल के पार्षद अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत के लिए क्यों तैयार हो गए...दिल्ली मेयर चुनाव के दौरान जो हुआ क्या उसकी स्क्रीप्ट पहले ही लिख दी गई थी. सड़क पर नेता क्या करते हैं किसी से छुपी हुई बात नहीं है..लेकिन जिन नेताओं को आप चुनकर भेजते हैं वो किस हद तक गिर सकते हैं आज दिल्ली मेयर चुनाव के दौरान पुरे देश ने देख लिया. ना शपथ पूरी हो पाई और ना ही मेयर का चुनाव हो पाया. लेकिन सवाल ये है की आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं. आम आदमी पार्टी का मेयर बनना तय था लेकिन ऐसा क्या हुआ की अरविंद केजरीवाल के पार्षद ही बीजेपी पार्षदों के उपर कुर्सियां फेंकने लगे. गलती वही हुई जो बीजेपी चाहती थी.
एक दूसरे के साथ तूतू मैं मैं... और मारपीट के हालत कैसे और क्यों बने पूरी कहानी आपको समझाते हैं. आम आदमी पार्टी नंबर गेम में बीजेपी से बहुत आगे है. 274 नेताओं को वोटिंग करनी थी. 150 की संख्या आम आदमी पार्टी के पास है जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास सिर्फ 113 वोट हैं. ऐसे में तय था की आम आदमी पार्टी का मेयर ही बनेगा. लेकिन चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल और उनके पार्षद डरे हुए थे. ऐसा इसलिए क्योंकि...दिल्ली के तरह चंडीगढ में भी आम आदमी पार्टी के पास बहुमत था लेकिन आखरी वक्त में बीजेपी का मेयर बन गया था.
चंडीगढ़ निगम चुनावों में AAP को 14 पार्षदों के साथ बहुमत मिला था, जबकि भाजपा को सिर्फ 12 सीटे मिले थी. इसके साथ ही आठ सीठे कांग्रेस को मिली थी. कांग्रेस के दो पार्षद बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे. जो बचे थे उन्होंने अपना वोट किसी को नहीं दिया. इसका फायदा बीजेपी ने उठाया और एक निर्दयीय पार्षद की मदद से चंडीगढ़ में अपनी सरकार बना ली. सबसे खास बाद ये है की मेयर चुनाव में दल बदल कानून भी नहीं लागू होता हैं...मतलब की कोई भी पार्षद किसी भी पार्टी के साथ जुड़ सकता है. संभावनाएं असीमित हैं और ऐसे मौके को बीजेपी कभी भी नहीं गवाती हैं. चंडीगढ़ के बाद बीजेपी दिल्ली में भी अपना ऑपरेशन लोटस चला रही है.
कांग्रेस ने वोटिंग करने से मना कर दिया इसलिए ये मुकाबला सीधा आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच में हो गया था. आरोप है की बीजेपी 10 मनोनीत पार्षदों की वोटिंग भी कराने की जुगाड़ में थी इसके बाद आप के कई पार्षद क्रास वोटिंग बीजेपी के पक्ष में करने के लिए तैयार थे. मतलब चुनाव अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने जीता लेकिन एमसीडी में सरकार बीजेपी की बनने वाली थी. वोटिंग से पहले ही जब ये बात आम आदमी के पार्षदो को पता चली तो हंगामा शुरू किया और बीजेपी पार्षदों के साथ मारपीट भी शुरू कर दी.
आम आदमी पार्टी ने मेयर पद के लिए शैली ओबेरॉय को चुना है जबकि बीजेपी ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है. हंगामा होने से पहले तक माना जा रहा था की शैली ओबेराय ही मेयर बनेंगी...लेकिन अब सूत्र बताते हैं की दो दर्जन से ज्यादा पार्षद बीजेपी को वोट करने वाले हैं. इसके लिए बीजेपी के दो बड़े नेता आफरेशन लोटस को संभाल रहे हैं. आम आदमी पार्टी के पार्षदो में गुस्सा था लेकिन बीजेपी के लिए बहुत बडा मौका मिल गया है. वैसे आपको क्या लगता है.

