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कैसे गिरती है आसमानी बिजली, आपके ऊपर गिरने से पहले शरीर करता है आगाह

Monday, July 12, 2021 | Monday, July 12, 2021 WIB

पिछले पांच सालों में बिजली गिरने से भारत में 8 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है...एक गांव तो ऐसा है जहां हर साल यहां 500 बार से ज्यादा बिजली गिरती है..,आकाशीय बिजली की चपेट में आने से लोगों की मौत के मामले मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में बढ़ते ही जा रहे हैं. 



ज्यादातर लोग जानकारी के अभाव की वजह से आकाशीय बिजली का शिकार होते हैं. अगर आकाशीय बिजली आपको अपनी चपेट में लेना चाहती है तो उससे पहले आपका शरीर आपको संकेत देता हैं..अगर आप इसे समझने में कामयाब रहे तो आसानी से बच सकते हैं. 

                                                                                                                                  लोगों को समझ में ये नहीं आता कि उन्हें बिजली अपनी चपेट मैं कैसे लेगी. इसका आसान सा तरीका है जब भी आप ऐसे मौसम में बाहर या घर के अंदर हों और आपके सिर के बाल खड़े हो जाएं, त्वचा में झुनझुनी हो तो समझ जाइए कि आप बिजली की चपेट में आ सकते हैं. इसलिए तत्काल झुककर दोनों हाथों से अपने कान बंद कर ले. 



अपने पंजों के बल बैठ जाएं. इस दौरान घुटने के ऊपर आपकी कुहनी होनी चाहिए. ये बात ध्यान रखिए कि आपके शरीर का जितना कम हिस्सा जमीन के संपर्क में रहेगा, आपके बचने के चांस उतने ही ज्यादा रहेंगे.


आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल मंडराते हैं. ये बादल एक दूसरे से टक्करा जाते हैं. टक्कराने से बिजली पैदा होती है जो धरती पर गिरती है. धरती पर गिरने से पहले बिजली लोहा, बिजली के खंभे जैसे उपकरण तलाशती है और फिर गिर पड़ती है... 


ये बात ध्यान रखिए कि ज्यादातर हादसों में आकाशीय बिजली हमेशा धरती पर मौजूद सबसे ऊंची वस्तु से टकराती है. इसलिए कभी भी ऐसे मौसम में ऊंची इमारत, पेड़ या खंभे के नीचे न खड़े हो. भारतीय मौसम विभाग के पास देशभर में लगभग 30 रडार हैं जो हर 10 मिनट में मौसम अपडेट प्रदान करते हैं.


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि की इसरो हर 15 मिनट में हमें ऐसे बादलों की जानकारी देता है जो बिजली पैदा करते हैं. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी और मध्य भारत में बिजली गिरने का का खतरा सबसे ज्तादा होता है. भारत में 12 ऐसे राज्यों हैं 


जहां सबसे अधिक आकाशीय बिजली गिरती है. इनमें मध्य प्रदेश पहले नंबर पर है. इसके बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा शामिल है...


झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम इलाके में स्थित एक गांव का नाम वज्रमारा है. यह नाम कब और कैसे पड़ा किसी को इसका पता नहीं है. लेकिन यहां हर साल सैकड़ों बार वज्रपात यानी आकाशीय बिजली गिरती है.


 इसलिए इसका नाम वज्रमारा रखा गया है. लेकिन इस गांव में जागरुकता अभियान चलाने की वजह से मौतों की संख्या में काफी ज्यादा कमी आई है. इस गांव और इसके आसपास लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए हैं. 

ये ऊपर से गिरने वाली बिजली को खींचकर सीधे जमीन में डाल देता है. इस गांव के आसपास ऐसे करीब डेढ़ दर्जन अरेस्टर लगाए गए हैं. जिसकी वजह से यहां लोग आकाशीय बिजली का शिकार बहुत कम होत हैं.

                                                                                                                                   हर मानसून में अकेले वज्रमारा गांव में करीब 500 बार बिजली गिरती थी. यहां पर इतना ज्यादा बिजली गिरने की मुख्य वजह जमीन में मौजूद लोहा और तांबा बताया जा रहा है. ये खनीज आकाशीय बिजली को अपनी ओर खींचते हैं. इसके अलावा जंगल और पहाड़ के बीच इस गांव का होना भी आकाशीय बिजली को आकर्शित करता है.

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