-->

Notification

×

Iklan

Iklan

Most Popular

40 साल के जिन्ना और 16 साल की नाबालिग पारसी लड़की की दुखद प्रेम कहानी

Saturday, February 13, 2021 | Saturday, February 13, 2021 WIB

इश्क करने वालों को दुनिया सदियों तक याद रखती है. फिर वैलेंटाइन वीक में ऐसी शख्सियतों को भला क्यों न याद किया जाए...प्यार न तो सरहदों में सिमट सकता है और न मजहब की दीवारें इसे रोक सकती है...इसकी मिसाल पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना भी रहे हैं...लेकिन जानकर आप हैरान होगे की भारत से पाकिस्तान को अलग करने वाले जिन्ना को एक गैर मुस्लिम 16 साल की नाबालिग लड़की से प्यार हुआ था...ये लड़की कोई और नहीं बल्कि जिन्ना के ही दोस्त की बेटी थी...

1892 में 15 साल की उम्र में मोहम्मद अली जिन्ना की पहली शादी इमीबाई नाम की लड़की से हुई थी...जिन्ना तब बहुत खुश थे. जिन्ना शादी के एक साल बाद तक जिन्ना अपनी पढ़ाई और पिता के बिजनेस में व्यस्त थे...लेकिन इसी दौरान कॉलरा बिमारी से इमीबाई की मौत हो गई...अब जिन्ना उलझे-उलझे से इमीबाई की याद में रहने लगे...जिन्ना पत्नी की मौत का सदम सह नहीं पा रहे थे...घरवालों ने दूसरी शादी करने के लिए कहा लेकिन जिन्ना ने इंकार कर दिया...

कुछ सालों बाद जिन्ना की मुलाकात एक युवा पारसी लड़की से हुई जिसका नाम रतनबाई था. रतनबाई को रती के नाम से भी जाना जाता था. 16 साल की रती बॉम्बे के सबसे अमीर व्यक्ति की इकलौती बेटी थीं... जिन्ना रती के पिता के दोस्त थे और उनसे मिलने अक्सर उनके घर जाते थे....जिन्ना की उम्र रती के पिता से सिर्फ तीन साल ही कम थी.....रती बहुत अलहदा थीं. अपनी उम्र के दोस्तों के साथ घूमने के बजाय उन्हें किताबें पढ़ना, घर में आने वाले मेहमानों से मिलना और राजनीति के बारे में बात करना बहुत पसंद था.... रती हर मुद्दे पर अपनी राय बेबाकी से रखती थीं. रती दिखने में बेहद खूबसूरत थीं. जो भी उनसे मिलता था, उनकी सुंदरता पर मोहित हो जाता था.


1916 में जिन्ना गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए दार्जिलिंग के पेटिट समर निवास पहुंचे थे.... यहीं पर रती और जिन्ना के बीच प्यार की शुरूआत हुई. रती जिन्ना को प्यार से जे. बुलाने लगी...जिन्ना की रोमांटिक कविताएं और कहानियां रती को बहुत पसंद आती थीं... जिन्ना को रती की खूबसूरती और बुद्धिमानी बहुत पसंद थी... रती से मिलने के बाद 40 साल के जिन्ना को रति से प्यार हो गया था....


छुट्टियों से लौटने के बाद, जिन्ना ने 16 साल की नाबालिग रती के पिता और अने दोस्त सर दिनशॉ से रती के साथ शादी करने की इजाजत मांगी. लेकिन सर दिनशॉ जिन्ना की बात सुनकर आगबबूला हो गए और जिन्ना को वहां से तुरंत चले जाने के लिए कहा....इस बीच रति के पिता सर दिनशॉ ने नाबालिग होने की बात कहकर कोर्ट से ये ऑर्डर हासिल भी हासिल कर लिया कि जिन्ना रती से किसी भी तरह का संबंध नहीं रख सकते...लेकिन बगावती रती 40 साल के जिन्ना के प्यार में पागल थी और वो कोर्ट के इस ऑर्डर को मानना नहीं चाहती थीं....जिन्ना और रति इसके बाद 18 महीने तक एक दूसरे से नहीं मिले....20 फरवरी 1918 को रती 18 साल की हो गईं. बालिग होने के साथ ही कोर्ट का आदेश उनके लिए अमान्य हो गया.....18 अप्रैल को रती ने अपना घर छोड़ दिया और जिन्ना के साथ जामिया मस्जिद चली गई...यहां दोनों ने मौलाना के सामने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया और अगले दिन ही जिन्ना से निकाह कर लिया.... रती के पारसी धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल किया तो पूरे देश में काफी हंगामा भी हुआ था...

जिन्ना और रती की शादीशुदा जिंदगी परियों की कहानी की तरह थी. जो भी उन्हें जानता था वो यही कहता था कि दोनों एक-दूसरे को कितना प्यार करते हैं. शादी के बाद जिन्ना ने उस क्लब की सदस्यता छोड़ दी जहां वो हर शाम शतरंज और बिलियर्ड्स खेलने जाते थे..... अब वो काम के बाद सीधा घर आते थे और बगीचे में अपनी पत्नी के साथ बातें करते हुए पूरी शाम गुजारते थे. रती अकेली ऐसी महिला थीं जिनके लिए जिन्ना के दिल में प्यार के जज्बात उमड़े थे. जिन्ना जहां भी जाते थे, रती उनके साथ जाती थीं. वो पूरी तरह से जिन्ना की राजनीति से जुड़ चुकी थीं.... कई लोगों का कहना था कि रती के उग्र राष्ट्रवाद ने ही जिन्ना को एक क्रांतिकारी के रूप में बदल दिया था...

14 अगस्त, 1919 की रात को जिन्ना और रती की एक बेटी हुई जिसका दोनों ने मिलकर नाम दीना रखा..इस बीच जनवरी 1921 में 'ऑल इंडिया कांग्रेस' और मुस्लिम लीग ने नागपुर में एक वार्षिक संयुक्त सत्र का आयोजन किया...इस आयोजन से अलग रखे जाने की वजह से जिन्ना परेशान हो गए... राजनीति से जिन्ना की दूरी का असर रती की जिंदगी पर भी पड़ रहा था. रती को लोगों से मिलना-जुलना पसंद था लेकिन जिन्ना अकेले रहना चाहते थे.... जैसे-जैसे समय बीतता गया, दोनों के बीच उम्र के मतभेद और बढ़ते गए...अब रती हमेशा दुखी और परेशान रहने लगीं थीं...


अप्रैल 1928 में रती अपने इलाज के लिए मां के साथ पैरिस चली गईं. वहां वो इलाज के दौरान कोमा में चली गईं. जिन्ना उस समय डबलिन के दौरे पर थे. उन्हें जब ये खबर मिली तो वो सब कुछ छोड़ कर पेरिस चले गए और वहां रती की पूरी देखभाल करने लगे....रती की बीमारी सही से किसी डॉक्टर को समझ नहीं आ रही थी. कोई नर्वस सिस्टम की तो कोई  कोलाइटिस की समस्या बता रहा था...इस समय जिन्ना की भी सेहत कुछ खराब रहने लगी....इस बीच दोनों एक बार फिर से खुश रहने लगे लेकिन साथ रहने के बाद किसी बात को लेकर फिर दोनों के बीच झगड़ा हुआ और फिर रती उन्हें छोड़कर बॉम्बे चली गई... बॉम्बे आने के बाद रती ताज होटल में गईं और फिर से बीमार पड़ गईं.... कुछ दिनों बाद जिन्ना भी पैरिस से लौट आए लेकिन दोनों अलग-अलग रहते थे..मोहम्मद अली जिन्ना कभी कभी अपनी मुह्बबत और पत्नी से मिलने भी जाया करते थे...

28 जनवरी 1929 को जिन्ना विधानसभा के बजट सत्र में भाग लेने के लिए दिल्ली आए थे....इसके बाद 18 फरवरी को रती फिर से कोमा में चली गईं, लेकिन इस बार वो इससे बाहर नहीं आ सकीं.... 20 फरवरी, 1929 को रती की उनके 29वें जन्मदिन के दिन मौत हो गई...जिन्ना 22 फरवरी की सुबह बॉम्बे पहुंचे...जिन्ना और रती की ये सच्ची कहानी इस बात का बेहतर उदाहरण है कि दो लोगों को एक साथ रखने के लिए सिर्फ प्यार काफी नहीं होता है. हालांकि, परिस्थितियां कैसी भी रहीं हों, दोनों ने कभी एक-दूसरे को प्यार करना कम नहीं किया.....
×
Latest Updates Update